इसरो के पूर्व प्रमुख के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली कमेटी ने नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट में मेडिकल शिक्षा के ढांचे में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं। कमेटी ने कहा कि एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्रों का चौथे वर्ष के आखिर में नीट की तर्ज पर ही सेंट्रलाइज्ड एग्जिट एग्जाम होना चाहिए। एमबीबीएस के दौरान ही एग्जिट एग्जाम होने से छात्रों पर अधिक बोझ नहीं पड़ेगा और उनकी प्रतिभा का विकास भी होगा। एग्जिट एग्जाम पास करने पर ही छात्रों को प्रैक्टिस करने का लाइसेंस मिलता है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट हिंदी और अंग्रेजी में अपलोड कर दिया गया है। राज्य, शिक्षाविद्, अभिभावक व छात्र 30 जून तक ड्राफ्ट पर अपने सुझाव भेज सकते हैं। सुझावों के आधार पर ड्राफ्ट में बदलाव किया जाएगा। कमेटी ने एमबीबीएस में एग्जिट एग्जाम का सुझाव देते हुए लिखा कि नेशनल मेडिकल कमीशन बिल में भी इसका प्रस्ताव था। इसके तहत नीट की तर्ज पर एमबीबीएस सेंट्रलाइजड एग्जिट एग्जाम का नियम लागू करना चाहिए। इसके अलावा कमेटी ने डेंटल एजुकेशन समेत अन्य मेडिकल कोर्स में एग्जिट एग्जाम शामिल करने का सुझाव दिया है।
जिलास्तर के अस्पतालों में मेडिकल सीटें बढ़ाने का सुझाव
कमेटी ने सुझाव दिया है कि देश के छह सौ अधिक जिला अस्पतालों को मेडिकल पढ़ाई में अपग्रेड किया जाना चाहिए। इन अस्पतालों में मेडिकल सीट बढ़ाने पर जोर दिया है। इनमें चिकित्सा सेवा विशेषज्ञ, योग्य शिक्षक समेत धनराशि भी मुहैया करवाई जाए। चिकित्सा सेवा संस्थान और अस्पताल दोनों को काम करने से पहले मंजूरी लेनी होगी। यहां पर एमबीबीएस, नर्सिंग व दंत चिकित्सा के अलावा अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी ट्रेनिंग देनी चाहिए। ऐसे अस्पतालों में मेडिसिन, डेंटल, नर्सिंग, आयुष आदि के विशेषज्ञ होने चाहिए।
महत्वपूर्ण सुझााव
- प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों व अन्य केंद्रों में नियुक्ति किए जाने वाले सहायक कर्मचारियों के लिए एक या दो वर्ष की अवधि के कौशल आधारित सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम चलाए जाएं।
- पाठ्यक्रम पूरे भारतवर्ष में एक समान होना चाहिए, जोकि स्वास्थ्य विश्वविद्यालयों और शासन अधिकृत चिकित्सा विज्ञान बोर्ड के द्वारा हेल्थ केयर सेक्टर स्किल काउंसिल के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया हो।
- प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे फिजियोथेरेपी, हॉस्पिटल मैनेजमेंट, मेडिकल, इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी पर ध्यान देने की जरूरत है।
- विज्ञान स्नातक में प्रथम वर्ष का ऐसा पाठ्यक्रम बनाया जाए जो एमबीबीएस प्रथम वर्ष के समान हो ताकि बीएससी प्रथम वर्ष किया छात्र नीट देकर एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सके। इसी तरह नर्सिंग व डेंटल प्रोग्राम के लिए भी पाठ्यक्रम बनाने की सिफारिश की गई है।
- नर्सों के लिए बीएससी नर्सिंग जरूरी होगा।
- नेशनल एक्रिडिटेशन निकाय भी बनेगा।