विधि आयोग ने यातना में दोषी पाए गए सरकारी अधिकारियों के लिए आजीवन कारावास की सिफारिश की है। आयोग ने सोमवार को कहा कि सरकार को विदेशों से अपराधियों के प्रत्यर्पण में होने वाली कठिनाइयों से पार पाने के लिए यूएन कन्वेंशन में औपचारिक सहमति हासिल करनी चाहिए। कानून के अभाव में ऐसे अपराधी प्रशासन की तरफ से कड़ी कार्रवाई से बच जाते हैं।
इसमें यह भी कहा गया है कि इन मामलों में सरकार को यातना पर यूएन कन्वेंशन और अन्य अमानवीय व हेय व्यवहार या सजा के संबंध में पुष्टि करनी चाहिए। सरकार की तरफ से सरकारी अधिकारियों की यातना से बचाने के लिए विभिन्न कानूनों में संशोधन के लिए संसद में बिल लाना चाहिए।
प्रिवेंशन ऑफ टॉर्चर बिल, 2017 के मसौदे में यातना के खतरे पर अंकुश लगाने के लिए दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रस्ताव किया गया है। इस मामले में सजा को जुर्माने समेत उम्रकैद तक बढ़ाया जा सकता है।