विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार सदन में शक्ति परीक्षण को आज (22 जुलाई) पूरा कराने की दृढ़ता दिखा रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष सदन की कार्यवाही को देर रात तक जारी रखने के प्रति अडिग हैं, लेकिन कांग्रेस और भाजपा के रणनीतिकारों की निगाह कई विकल्पों पर टिकी है। सदन में विश्वासमत के बाबत कांग्रेस ने व्हिप जारी किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने कमान संभाल रखी है। मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी कांग्रेस के नेताओं से मंत्रणा करके आखिरी दांव में जुट गए हैं। दूसरी तरफ भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व मुख्यमंत्री और सरकार गिरने की दशा में भावी मुख्यमंत्री के दावेदार बीएस येदियुरप्पा कोई चूक नहीं होने देना चाहते।
13+3 बागी विधायक को छोड़कर सदन में बहुमत भाजपा के पक्ष में है। भाजपा के पास 105 अपने विधायक हैं। उसे दो निर्दल भी समर्थन देने की बात कह रहे हैं। कांग्रेस-जद(एस) की सरकार के पास 100 विधायकों का समर्थन है। एक बसपा सुप्रीमो मायावती की घोषणा के बाद बसपा का एक विधायक समर्थन दे सकता है। इस तरह से सरकार के पक्ष में 101 विधायक की संभावना दिखाई दे रही है। कांग्रेस के रणनीतिकारों की बात सच मान लें तो सरकार के पक्ष में 106 विधायक का संख्याबल संभव है। इस पर कांग्रेस पार्टी और जद(एस) के रणनीतिकार एक दावा और कर रहे हैं। उनका कहना है कि 4-5 भाजपा के विधायक अपनी पार्टी का साथ छोड़ सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि अभी यह पर्दा उठना बाकी है। पहले भाजपा अपने विधायकों को खुल्ला तो छोड़े। वरिष्ट नेताओं का कहना है कि इसी डर से भाजपा लगातार अपने विधायकों को रिसार्ट में रख रही है।
चाहे कांग्रेस हो या भाजपा दोनों दलों की केंद्रीय ईकाई काफी फूंक-फूंककर कदम रख रही है। भाजपा के एक नेता का कहना है कि पहले कर्नाटक में कुछ तो हो। फिलहाल वहां लोकतंत्र की मर्यादा तार-तार हो रही है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि जो हो रहा है, उसकी जिम्मेदार भाजपा और उसके नेता बीएस येदियुरप्पा हैं। कांग्रेस नेताओं के यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है, लेकिन हो रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के नेताओं का मानना है कि राज्य में सत्ता को लेकर मचे इस घमासान को स्थानीय स्तर पर ही रहने देना ठीक है। बताते हैं शायद यही वजह है कि दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों का केंद्रीय नेतृत्व सावधान है।