आशंका 4- किसानों की आपत्ति थी कि नए कानून में कृषि अनुबंधों के पंजीकरण की व्यवस्था नहीं है।
प्रस्ताव- सरकार ने प्रस्ताव किया है कि जब तक राज्य सरकारें पंजीकरण के नियम नहीं बनाती हैं तब तक एक करार करके उसे एसडीएम के पास जमा कराया जा सकता है जो अनुबंध की हैसियत रखने वाला होगा।
आशंका 5-6- किसानों की सबसे बड़ी आशंका है कि नए किसान कानूनों से कंपनियां किसानों की भूमि पर कब्जा कर सकती हैं। किसानों की भूमि कुर्क हो सकती है।
प्रस्ताव- केंद्र ने प्रस्ताव किया है कि कानून में यह ज्यादा स्पष्ट कर दिया जाएगा कि किसान की भूमि पर बनने वाली किसी भी संरचना पर कंपनी कोई लोन नहीं ले सकेगी। वह इसे बंधक भी नहीं रख सकेगी। (आशंका थी कि किसानों के खेेत में किसी निर्माण के बहाने कंपनी लोन ले लेगी तो उसे चुकाने में अक्षम रहने पर बैंक या कर्जदाता किसान की भूमि कुर्क कर लेंगे।) इसके अलावा भूमि किसी भी कृषि समझौते से बाहर रहेगी।
आशंका 7- खुले बाजार में खरीदारी होने पर धीरे-धीरे एपीएमसी मंडियां अनुपयोगी हो जाएंगी और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा।
प्रस्ताव- केंद्र ने स्पष्ट किया है कि उसका एपीएमसी मंडियों को खत्म करने की कोई योजना नहीं है। केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद जारी रहने के लिए लिखित आश्वासन देने के लिए तैयार है।
आशंका 8- किसानों की आशंका है कि बिजली सुधारों के नाम पर उन्हेंं मिलने वाली मुफ्त बिजली व्यवस्था खत्म की जा सकती है।
प्रस्ताव- केंद्र ने साफ किया है कि किसानों को मिलने वाली बिजली की वर्तमान व्यवस्था में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
आशंका 9- किसानों का कहना है कि पराली जलाने पर दंड लगाए जाने की व्यवस्था खत्म की जानी चाहिए। किसानों की आशंका है कि इसमें एक करो़ड़ रूपये तक का दंड लगाए जाने का प्रावधान है।
प्रस्ताव- केंद्र ने कहा है कि किसानों की इस समस्या का समाधान किया जाएगा। एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ऑफ एनसीआर ऑर्डिनेंस, 2020 के अंतर्गत किसानों की आपत्तियों का हल निकाला जाएगा।
किसान नेता ने कहा
महाराष्ट्र-गुजरात में किसान आंदोलन चला रही प्रतिभा शिंदे ने कहा कि सरकार कृषि कानूनों में संशोधन करना चाहती है। लेकिन संशोधन तब होता है जब कानून का मूल सही हो। यहां कृषि कानूनों का मूल ही गलत है, इसलिए हम इनमें संशोधन की किसी बात को स्वीकार नहीं करेंगे। सरकार को इस कानून को वापस लेकर सभी संबंधित पक्षों को साथ लेकर एक नया कानून बनाना चाहिए।