उन्होंने कहा कि इस टीके का भिन्न देशों में अलग-अलग दाम होगा। विकसित देशों में टीके की कीमत उनके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आधार पर तय की जाएगी। वहीं, मध्यम आय वर्ग के देशों के लिए इसकी कीमत और कम होगी। वहीं निचली आय वाले देशों मसलन अफ्रीका को यह टीका बिना किसी लाभ के उपलब्ध कराया जाएगा।
बोर्ला ने कहा कि विकसित देशों में भी टीके की कीमत इतनी ही रखी जाएगी, जिसे वे आसानी से वहन कर सकें। अमेरिका में टीके का दाम 19.50 डॉलर है, जो वहां एक बार के भोजन का औसत दाम है। उन्होंने कहा कि कंपनी विभिन्न सरकारों से वैक्सीन के लिए बात कर रही है।
ब्रिटेन के औषधि नियामक ने बुधवार को फाइजर की कोरोना वायरस वैक्सीन के लिए एलर्जी की चेतावनी जारी की। यह चेतावनी उन लोगों के लिए जारी की गई है जिन्हें पूर्व में दवाओं, भोजन या वैक्सीनों से एलर्जिक रिएक्शन की समस्या रही है। नियामक ने कहा है कि ऐसे लोग इस वैक्सीन की खुराक न लें।
वैक्सीन न लेने की यह चेतावनी तब जारी की गई जह राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) के दो कर्मचारियों ने फाइजर की वैक्सीन की खुराक लेने के बाद 'एनाफिलेक्टाइड रिएक्शन' महसूस किया। हालांकि, अब कहा जा रहा है कि इन दोनों कर्मचारियों की स्थिति में सुधार हो रहा है और उनकी तबीयत भी ठीक है।
इधर, भारत में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के विशेषज्ञों की एक समिति ने बुधवार को कोविड-19 टीका के लिए सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक से अतिरिक्त सुरक्षा एवं प्रभावी डाटा मांगा है। टीके के आपातकालीन उपयोग के लिए अनुमति मांगने के उनके आवेदन पर विचार-विमर्श के बाद उन्होंने यह डाटा मांगा है। यह जानकारी आधिकारिक सूत्रों ने दी।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर की भारतीय शाखा के आवेदन पर बुधवार को विचार-विमर्श नहीं हुआ क्योंकि कंपनी ने समिति के समक्ष प्रस्तुतीकरण देने के लिए और समय मांगा। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार एक सूत्र ने बताया कि भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के आवेदन अब भी विचाराधीन हैं।
सूत्रों ने बताया कि सीरम इंस्टीट्यूट के आवेदन पर विचार करते हुए सीडीएससीओ की विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने समझा जाता है कि देश में दूसरे चरण और तीसरे चरण के परीक्षण पर अद्यतन सुरक्षा डाटा, ब्रिटेन और भारत में क्लीनिकल परीक्षण के प्रतिरक्षाजनक डाटा की मांग की है। साथ ही ब्रिटेन औषधि एवं स्वास्थ्य देखभाल उत्पाद नियामक एजेंसी (एमएचआरए) के आकलन का परिणाम भी मांगा है।
हैदराबाद के भारत बायोटेक के लिए विस्तृत विचार-विमर्श के बाद एसईसी ने अनुशंसा की कि कंपनी को देश में वर्तमान में जारी तीसरे चरण के क्लीनिकल परीक्षण की सुरक्षा एवं प्रभाविता संबंधी डाटा पेश करना चाहिए ताकि इस पर आगे विचार किया जा सके।
भारत बायोटेक ने स्वदेश में निर्मित कोविड-19 का टीका कोवैक्सिन के आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी देने के लिए भारत के दवा महानियंत्रक (डीसीजीआई) के पास सात दिसंबर को आवेदन दिया था। वहीं पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ने ऑक्सफोर्ड कोविड-19 टीका कोविशील्ड के लिए छह दिसंबर को मंजूरी मांगी थी। फाइजर ने अपने टीके के आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी के लिए चार दिसंबर को आवेदन दिया था।