मध्यप्रदेश ऐसा कानून बनाने वाला पहला राज्य है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्र सरकार को इस फैसले के लिए धन्यवाद दिया है।
चौहान ने कहा, "हमारी बेटियों की सुरक्षा के लिए यह बड़ा कदम उठाए गया है। मैं पीएम और केंद्रीय मंत्रिमंडल का धन्यवाद करता हूं। मध्य प्रदेश ने भी इस दिशा में एक कदम उठाया था। इससे अपराधियों में डर पैदा होगा और वे इस तरह के गंभीर अपराध करने से पहले सोचेंगे।"
वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा है कि वो सरकार के इस कदम का स्वागत करती हैं।
साथ ही उन्होंने कहा, "लेकिन मुख्य चुनौती कानून को लागू करने की है। मैं अभी भी सुझाव दूंगी कि फास्ट ट्रैक कोर्ट होने चाहिए ताकि जल्द से जल्द न्याय मिल सके।"
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद का कहना है कि न्यायपालिका के जरिये इस मुद्दे को सुलझाने में बहुत मदद नहीं मिलने वाली, इस समस्या की जड़ का समाधान करना होगा।
उन्होंने कहा, "यह एक संवेदनशील मुद्दा है और हाल में हुई घटनाएं शर्मनाक हैं। सरकार को अपने फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए। हमें ऐसे अपराधों के मूल कारण को खोजने की जरूरत है क्योंकि न्यायपालिका सिर्फ एक सीमा तक ही मदद कर सकती है।"