इशरत जहां ने अध्यादेश के जरिए तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने के केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसले का स्वागत किया है। हावड़ा में रहने वाली इशरत ने बुधवार को पत्रकारों से कहा कि यह फैसला मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है।
उन्होंने कहा कि अब मुस्लिम पुरुषों और धार्मिक नेताओं को अपने तौर तरीकों में बदलाव लाना चाहिए। ऐसा नहीं होने की स्थिति में उन्हें नतीजा भुगतने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। इशरत उन पांच याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं, जिन्होंने तीन तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 22 अगस्त को तीन तलाक को गैरकानूनी घोषित कर दिया था।
इशरत जहां के पति ने वर्ष 2014 में उन्हें दुबई से फोन पर तीन तलाक दे दिया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। इशरत की 13 साल की एक बेटी और सात साल का एक बेटा भी है।
तलाक के मामले में अल्लाह के कानून को मानेंगे: आजम
तीन तलाक अध्यादेश पर पूर्व मंत्री आजम खां का कहना है कि 'भाजपा का यह चुनावी मुद्दा है। अल्लाह से बड़ा हमारे लिए कोई कानून नहीं है। इसलिए हम तलाक के मामले में सिर्फ अल्लाह के कानून को ही मानेंगे।' उन्होंने कहा कि 'अध्यादेश में किन बातों को शामिल किया, है इसकी जानकारी मुझे नहीं है।'
अब हुआ इंसाफ पूरा: आतिया
तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहली याचिका दायर करने वाली आतिया साबरी का कहना है कि कानून बनने से मुस्लिम महिलाओं को पूर्ण न्याय मिला है, जो जरूरी था। अब तीन तलाक पर रोक लग सकेगी। आतिया का निकाह हरिद्वार जिले के खानपुर थानांतर्गत जसोधर गांव में वाजिद के साथ हुआ था। दो बेटियां होने के बाद 12 दिसंबर 2015 को उसे जहर देकर मारने का प्रयास किया गया। दस रुपये के स्टांप पर तीन तलाक लिखकर उसके घर भेज दी गई। 2016 में दोषियों को सजा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची और पहली जंग जीती। वह कहती हैं, 'निकाह के वक्त पति और पत्नी की सहमति जरूरी है तो तलाक एकतरफा कैसे हो सकता है।'
उलेमा को त्वरित टिप्पणी से परहेज
तीन तलाक के खिलाफ केंद्र सरकार के अध्यादेश पर देवबंदी उलेमा ने कोई त्वरित टिप्पणी नहीं की है। जमीयत उलमा हिंद के अध्यक्ष एवं ऑल इंडिया मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि अध्यादेश अभी तक पूरी तरह सामने नहीं आया है और इसे देखे बिना कुछ नहीं कहा जा सकता है। दारुल उलूम ने भी अध्यादेश को देखे बिना किसी तरह की टिप्पणी या प्रतिक्रिया देने से फिलहाल परहेज किया है। वहीं दूसरे देवबंदी उलेमा का कहना है कि अध्यादेश पर उलेमा का मशविरा भी लिया जाना चाहिए।