डिजिटल भुगतान को बढ़ाने देने के लिए आरबीआई वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों (फिनटेक) का सहयोग लेगा। इसके लिए सूचना तकनीक क्षेत्र के महारथी नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई है, जो अगले तीन महीने में आरबीआई को रिपोर्ट सौंपेगी। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को नीति आयोग द्वारा आयोजित ‘फिनटेक सम्मेलन’ में बताया कि फिनटेक के जरिए डिजिटल भुगतान को और बेहतर करने एवं वित्तीय समावेशन को बढ़ाने के लिए कदम उठाये जा चुके हैं।
दास ने कहा कि फिनटेक क्षेत्र में नवोन्मेष को बढ़ावा देने के लिए रेगुलेटरी सैंडबॉक्स बनाया जाएगा, जिसके लिए अगले दो महीने में दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। रेगुलेटरी सैंडबॉक्स ऐसा तरीका है, जो किसी नई प्रौद्योगिकी या प्रणाली को अमल में लाने से पहले नियामक की देखरेख में प्रयोग करने एवं सीखने की सहूलियत देता है।
यह फिनटेक कंपनियों को कम लागत और कम कीमत पर नए नवोन्मेषी उत्पाद पेश करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि यह आवश्यक है कि फिनटेक क्षेत्र की पूरी क्षमता के दोहन के लिए इस क्षेत्र में निवेश का सही प्रवाह हो। फिनटेक क्षेत्र में मोबाइल भुगतान, मनी ट्रांसफर, ऋण, क्राउड-फंडिंग, एसेट मैनेजमेंट सहित कई अन्य चीजें शामिल हैं। दास इस क्षेत्र के विकास को प्रभावित करने वाले मुद्दों और चिंताओं को समझने के लिए इस सप्ताह पेमेंट बैंक के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे।
फिनटेक अपनाने में दूसरे नंबर पर भारत
दास ने फिनटेक रिपोर्ट-2019 का हवाला देते हुए कहा कि फिनटेक अपनाने के मामले में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है। इससे आगे सिर्फ अमेरिका है। देश में फिनटेक अपनाने की दर 52 फीसदी है। उन्होंने कहा कि देश में अभी 1,218 फिनटेक कंपनियां परिचालन में हैं और इन्होंने निवेश के अवसर समेत भारी मात्रा में रोजगार सृजित किए हैं।
वित्त मंत्री से मिले आरबीआई गवर्नर
आरबीआई गर्वनर ने सोमवार को ही वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की। माना जा रहा है कि दोनों के बीच 2019-20 के लिए पहली द्वैमासिक मौद्रिक नीति से पहले वर्तमान आर्थिक स्थिति पर चर्चा हुई। पहली द्वैमासिक मौद्रिक नीति पर चर्चा के लिए छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समीक्षा (एमपीसी) की बैठक 2 से 4 अप्रैल तक होगी। 4 अप्रैल को नीति की घोषणा होगी। मुलाकात के बाद दास ने कहा कि यह एक शिष्टाचार बैठक थी। मौद्रिक नीति की बैठक से पहले आरबीआई गवर्नर की वित्त मंत्री से मिलने की परंपरा है। यह उसका ही हिस्सा था।