भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को एक बार फिर नए कर्ज बांटने के लिए नियमों में तब्दीली के प्रयासों को लेकर चेतावनी दी। शीर्ष बैंक ने कहा कि फंसे हुए कर्ज की बड़ी मात्रा और इसकी रिकवरी के अपर्याप्त प्रावधानों के बावजूद विनियामक पूंजीगत आवश्यकता या जोखिम भार में किसी तरह की ढील बैंकों को सीधेतौर पर और अर्थव्यवस्था को सामान्य रूप से हानि पहुंचा सकती है।
आरबीआई ने ‘ट्रेंड्स एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग’ पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट में यह चेतावनी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, बेसिल-3 मानक अंतरराष्ट्रीय सकल बकाया दर (सीडीआर) और रिकवरी रेट के आधार पर विभिन्न प्रकार के कर्ज देने वालों के लिए जोखिम भार जारी करते हैं। हालांकि यहां (भारत में) सीडीआर और नुकसान नुकसान पहुंचाने वाले बकाया (एलजेडी) की दर अंतरराष्ट्रीय औसत से बहुत ज्यादा देखी गई है।