उन्होंने बैंकिंग नियमन की शक्ति को बैंक स्वामित्व से निरपेक्ष किए जाने और सरकारी तथा निजी बैंकों के लिए समानता का अवसर कायम किए जाने की वकालत की।
उन्होंने कहा कि धोखाधड़ी का मामला उजागर होने के बाद यह कहा जाता है कि आरबीआई के निगरानी दस्ते को इसे पहले ही पकड़ना चाहिए था। लेकिन कोई भी बैंक नियामक धोखाधड़ी के सभी मामलों को नहीं पकड़ सकता है। नियामक के लिए यह संभव नहीं कि वह धोखाधड़ी को खत्म करने के लिए हर बैंकिंग गतिविधि में हस्तक्षेप करे।
आरबीआई ने धोखे की आशंका पर पहले किया था आगाह
पीएनबी का हवाला देते हुए पटेल ने कहा कि साइबर जोखिमों को देखते हुए आरबीआई ने संचालन के खतरों के सटीक स्रोत को पहले ही भांप लिया था जिसके जरिए हमें लगता है कि अब धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया है।
विशेष रूप से उन्होंने कहा कि आरबीआई ने 2016 में तीन सर्कुलरों के जरिए सटीक निर्देश जारी किया था, ताकि बैंक इन खतरों को दूर करने में समर्थ हो सकें। अब ऐसा लगता है कि बैंकों ने उस पर अमल नहीं किया। पटेल ने कहा कि आरबीआई बैंकों के विरुद्ध कार्रवाई करेगा।