भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर रघुराम राजन ने मंगलवार को कहा कि विदेश में खाते रखने के उचित कारण भी हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि पनामा दस्तावेजों की सूची में शामिल भारतीयों के ऐसे निवेश की वैधता की जांच विभिन्न एजेंसियों का दल करेगा।
सोमवार को सरकार द्वारा सूची की जांच के लिए घोषित विभिन्न एजेंसियों में आरबीआई भी शामिल है। उल्लेखनीय है कि पनामा दस्तावेज की सूची में लगभग 500 भारतीय सेलेब्रिटी और उद्योगपति शामिल हैं।
2016-17 की द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करने के बाद राजन ने कहा, ‘हम जांच टीम का हिस्सा हैं और इस मामले को देखने जा रहे हैं। यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि विदेश में खाते होने की उचित वजहें हो सकती हैं।
एलआरएस स्कीम आपको पैसे बाहर ले जाने की अनुमति देती है। हालांकि, अभी यह देखा जाना है कि क्या वैध है और क्या अवैध। यह जांच की प्रक्रिया है जो होगी।’
उदारीकृत रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत सभी निवासी भारतीय (अवयस्क सहित) को एक वित्त वर्ष के दौरान ढाई लाख डॉलर किसी भी स्वीकृत चालू या पूंजीगत खाते या दोनों में भेजने की अनुमति है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे इस मसले पर चर्चा की थी और उनकी सलाह पर विभिन्न एजेंसियों की जांच टीम बनाई गई है। इस जांच टीम में सीबीडीटी, आरबीआई और एफआईयू के अधिकारी शामिल हैं।