रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने नासिक के इंडिपेंडेंस को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि इस सहकारी बैंक के पास न तो पर्याप्त पूंजी है और न ही इसकी ओर से कमाई की कोई खास संभावनाएं हैं। इस वजह से यह कदम उठाया जा रहा है।
रिजर्व बैंक ने गुरुवार को बयान में कहा कि तीन फरवरी 2022 से ही कारोबार के घंटे समाप्त होने के बाद इंडिपेंडेंस को-ऑपरेटिव बैंक कारोबारी गतिविधियां नहीं कर सकेगा। यह बैंक बैंकिग नियमन अधिनियम, 1949 की जरूरतों का अनुपालन करने में विफल रहा है। बयान में कहा गया है कि लिक्विडेशन (परिसमापन) के बाद बैंक के प्रत्येक जमाकर्ता को जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) से पांच लाख रुपये तक की सीमा में जमा बीमा दावा राशि मिलेगी।
बैंक ने जो डेटा उपलब्ध कराया है, उसके मुताबिक, 99 फीसदी से ज्यादा उपभोक्ता डीआईसीजीसी से अपनी जमा की पूरी राशि पाने के हकदार हैं। आरबीआई ने कहा है कि इस बैंक को चलने देना जमाकर्ताओं के हित के खिलाफ है और इसकी मौजूदा वित्तीय स्थिति देखी जाए तो यह बैंक जमाकर्ताओं को पैसे लौटाने की स्थिति में भी नहीं है।
इंडिपेंडेंस को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द होने के साथ ही अब यह बैंक किसी भी तरह की कारोबारी गतिविधि में शामिल नहीं हो पाएगा। यह सिर्फ जमा की गई राशि को लौटाने और क्लेम भुगतान पूरे होने तक ही संचालित होगा।