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साझा ऑपरेशन: अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे से पहले कश्मीर में आतंकियों का होगा सफाया

सार

अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते दबदबे को देखते हुए देश की खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों सक्रिय हो गई हैं। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खात्मे की खास योजना तैयार की गई है।
 
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एनआईए - फोटो : ANI
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में दो दिनों से 'एनआईए, रॉ, आईबी और लोकल पुलिस' का संयुक्त ऑपरेशन चल रहा है। दूसरी तरफ बॉर्डर पर तैनात सुरक्षा बलों को भी सचेत कर दिया गया है। खासतौर पर जम्मू से लगती पाकिस्तान की सीमा पर अतिरिक्त चौकसी बरती जा रही है। एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इस बार घाटी ही नहीं, बल्कि पूरे जम्मू कश्मीर से आतंकवाद का सफाया कर दिया जाएगा। चूंकि बॉर्डर पर सीज फायर है, इसलिए तेजी के साथ आतंकियों और उनके मददगारों को ढूंढा जा रहा है। 

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स्लीपर सेल व आईएआई का गठजोड़ तोड़ा जाएगा
सीआरपीएफ डीजी कुलदीप सिंह, जिनके पास एनआईए के कार्यवाहक डीजी का कार्यभार है, वे जम्मू का दौरा कर चुके हैं। सुरक्षा एवं जांच एजेंसियां का प्रयास है कि अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने से पहले कश्मीर घाटी को आतंकियों से खाली करा दिया जाए। इस ऑपरेशन के जरिए नई भर्ती के लिए हाथ पांव मार रहे पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों के स्लीपर सेल और 'आईएसआई' का गठजोड़ तोड़ दिया जाएगा। 

जांच एजेंसी के अधिकारी का कहना है कि तालिबान दावा करता है कि उसने अफगानिस्तान के 85 फीसदी हिस्से पर नियंत्रण कर लिया है। इसके मद्देनजर, भारतीय सुरक्षा बलों को अतिरिक्त चौकसी बरतनी पड़ रही है। जम्मू-कश्मीर को लेकर तालिबान की क्या रणनीति रहती है, ये देखनी वाली बात है। पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता है, इसलिए अफगानिस्तान में तालिबान के नियंत्रण से पहले जम्मू कश्मीर को आतंकवाद से मुक्त कराना होगा। 

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तो हो सकती है भारत की मुश्किल

अधिकारी का कहना है कि अगर ऐसी आशंका बनी कि जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन तालिबान के सहयोग से अफगानिस्तान में रह कर भारत के खिलाफ अपनी गतिविधियां शुरु करते हैं तो वह मुश्किल वाली स्थिति हो सकती है। मौजूदा समय में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में करीब 175 आतंकी मौजूद हैं। ये आतंकी हमला करने के लिए अब नए नए तरीके खोज रहे हैं। जम्मू में ड्रोन हमला, आतंकियों की नई रणनीति का हिस्सा है। वे सुरक्षा बलों के साथ सीधी भिड़ंत से बच रहे हैं। पिछले दिनों मुठभेड़ में दर्जनों आतंकी मारे जा चुके हैं। 
एनआईए को रॉ और आईबी द्वारा अहम इनपुट मुहैया कराया गया है। 

सूत्रों के मुताबिक, 'आईएसआईएस' जम्मू कश्मीर में मौजूद आतंकी संगठनों के साथ गठजोड़ करना चाह रहा है। अगर अफगानिस्तान पर तालिबान का पूर्ण नियंत्रण हो जाता है तो 'आईएसआईएस' यहां अपनी गतिविधियां बेखौफ होकर संचालित कर सकता है। इस आतंकी संगठन ने देश के कई हिस्सो में भर्ती अभियान शुरू कर रखा है। एनआईए द्वारा ऐसे कई मामलों का भंडाफोड़ किया गया है। सोशल मीडिया के जरिए भी युवाओं को गुमराह किया जा रहा है। अनंतनाग, बांदीपोरा, बारामूला, बडगाम, डोडा, गांदरबल, किश्तवाड़, कुलगाम, पुलवामा, राजौरी व शोपियां आदि इलाकों में आतंकी संगठन सक्रिय हैं। हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा व जैश-ए-मोहम्मद के अलावा अल-बदर और अंसार गजवत-उल हिंद जैसे छोटे संगठन भी सिर उठाने की कोशिशों में लगे हैं। 
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आतंकियों के मददगार को सामने लाया जाएगा

रॉ और ईडी की जानकारी के आधार पर घाटी में आतंकियों के मददगारों की सूची तैयार की गई है। आने वाले दिनों में आतंकियों के मददगारों को बाहर निकाल लिया जाएगा। रविवार और सोमवार को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में एनआईए ने अपना छापेमारी अभियान जारी रखा है। प्रतिबंधित आतंकी संगठन 'आईएसआईएस' द्वारा भारत में हिंसक गतिविधियां शुरु करने के लिए युवाओं को कट्टरपंथ की राह पर ले जाने का प्रयास हो रहा है। एनआईए ने इस बाबत 29 जून को एक मामला दर्ज किया गया था। 

भारत-केंद्रित ऑनलाइन दुष्प्रचार पत्रिका 'द वॉयस ऑफ हिंद' (वीओएच), जो कि महीने में एक बार छपती है, उसके जरिए युवाओं को गुमराह किया जा रहा था। इसके लिए 'साइबरस्पेस' में एक संगठित अभियान शुरू किया गया है। यहां पर दुष्प्रचार की मदद से युवाओं को आईएसआईएस में भर्ती होने के लिए उकसाया जाता है। पिछले दो वर्षों में एनआईए और ईडी ने जम्मू कश्मीर में आतंकियों के स्लीपर सैल बनकर उन्हें मदद पहुंचाने वाले कई लोगों को पकड़ा है। 

इन इलाकों में एनआईए ने दी दस्तक
श्रीनगर, अनंतनाग, मगरे मोहल्ला, दलाल मोहल्ला, दारुल उलूम इलाका, बारामुला, अवंतीपुरा व नवाबजार सहित कई इलाकों में एनआईए ने दस्तक दी है। जांच एजेंसी के अधिकारी बताते हैं कि अब यह कार्रवाई तभी खत्म होगी, जब आतंकियों को मददगार सामने आ जाएंगे। अधिकारी का कहना है कि जांच एजेंसी के पास ऐसे लोगों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। आने वाले दिनों में जम्मू कश्मीर के दूसरे इलाकों में भी ऐसे छापे मारे जाएंगे। 
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