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कानों देखीः सदन में रवि किशन का गाना और प्रधानमंत्री मोदी की पारखी नजर

Wed, 03 Jul 2019 04:05 PM IST
शशिधर पाठक शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : Instagram
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गोरखपुर से पहली बार सांसद बने रवि किशन ने कमाल ही कर दिया है। संसद में उनसे मिलने वाला का मजमा लगा रहता है। उनके साथ सेल्फी और ऑटोग्राफ चाहने वालों की भी कमी नहीं है। हालांकि इन दिनों वह अपने एक गीत का फीडबैक जानने के लिए खासे उत्सुक हैं। लोकसभा में उन्होंने एक गाना गया था 'गंगा मईया तोहे पियरी चढ़ैइबै', वो जानना चाहते हैं कि यह खबर कितने अखबारों में छपी है। 
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दरअसल रवि बाबू जानते हैं कि उनसे पहले भाजपा में आए दूसरे भोजपुरी सितारे मनोज तिवारी का राजनीतिक करियर भी भोजपुरी गीतों के बूते ही परवान चढ़ा है। इसलिए रवि बाबू भी इसी लाइन पर चल रहे हैं। अब उन्हें कौन बताए कि सदन में गाना-वाना जैसी हल्की-फुल्की बातें नहीं चलतीं। तभी तो सभापति ने भी उन्हें टोका और मना किया, लेकिन सच तो यह भी है कि राजनीति में सब जायज है।

बल्लेबाज विधायक के पिताजी बस मुस्कुराए

भाजपा के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय धाकड़ नेता हैं। सफल राजनीति का कौशल है उनके पास। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के डिजाइन को पश्चिम बंगाल में जमीन पर उतारने में उनका कोई जवाब नहीं है। लेकिन मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैलाश के बेटे आकाश विजयवर्गीय के बहाने पार्टी के तमाम सांसदों को नसीहत दे दी। संसदीय बोर्ड की यह बैठक जैसे ही खत्म हुई, भाजपा के कई नेता भाजपा महासचिव के चेहरे को पढ़ने की कोशिश में लगे थे। जबकि जवाब में कैलाश केवल मुस्कुरा रहे थे। 
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बताते हैं संसदीय बोर्ड कि बैठक में संतकबीरनगर के पूर्व जूताबाज सांसद के पिता रमापतिराम त्रिपाठी भी मौजूद थे। दरअसल प्रधानमंत्री ने यह नैतिकता का पाठ केवल आकाश को नहीं पढ़ाया, बल्कि भाजपा के उन तमाम नेताओं को भी पढ़ाया जो आए-दिन फजीहत कराते हैं। मामला चाहे भीड़ हिंसा का हो या गो तस्करी का, प्रधानमंत्री ने सबको संदेश दिया है कि अब यह सब नहीं चलने वाला।

भविष्य पर निगाह है और तारीफ में चिराग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में एक शेर सुनाया। हौसला रखते हैं ऊंची उड़ान का तो आसमान का कद क्या नापना। भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में उन्होंने इसकी झलक भी दिखाई। प्रधानमंत्री ने सांसदों ने सदन में बैठने, कामकाज सीखने, नियम कानून समझने की सीख दी। यहां तक तो ठीक था। इस ताकीद में प्रधानमंत्री ने जो उदाहरण पेश किया, वह सबको चौंका गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सबको चिराग पासवान से सीखना चाहिए। चिराग लोकसभा में सबसे अधिक समय देने वाले युवा सांसदों में हैं। वह जानना, सीखना, समझना चाहते हैं। 

प्रधानमंत्री के इस तुलना की भाजपा सांसदों में भी चर्चा रही। दरअसल चिराग ही अब लोक जनशक्ति पार्टी का चिराग हैं। आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में भी चिराग की तरह की रोशनी देंगे। केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान की तबीयत ठीक नहीं रहती। भूलने की बीमारी से भी पासवान ग्रसित चल रहे हैं। लोजपा तो चिराग ही चला रहे हैं। जाने भगवान आने वाले समय में बिहार के राजनीति की हवा किस दिशा में चले।

पीएम के संसदीय क्षेत्र का लंगड़ा आम रह गया

राज्यसभा के सभापति के साथ सभी पार्टियों के नेताओं की कामकाज को लेकर सुबह की बैठक का दौर था। प्रो. राम गोपाल यादव ने चौसा आम के स्वाद को बताया। जाहिर है मुंह में पानी आएगा। तृणमूल सांसद ने पश्चिम बंगाल के मालदा का बखान किया। आमों में अलफांसो से बड़ा और मंहगा भला कौन है तो माजिद मेनन ने इसकी तारीफ कर दी। रत्नागिरी का अलफांसो तो अलफांसो है। 

आंध्र के बैगनपल्ली समेत कई और आम की किस्मों का जिक्र हुआ। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस के लंगड़ा आम पर कुछ खास नहीं हो पाया। कुछ इसी तरह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र लखनऊ के मलीहाबादी दशहरी के स्वाद का जिक्र भी छूट गया।
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