टाटा समूह से जुड़े उद्योग सूत्रों के मुताबिक रतन टाटा को फरवरी अंत तक के लिए अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया गया है, लेकिन यदि चुनाव समिति निर्धारित चार महीने की अवधि में सर्वाधिक उपयुक्त वारिस चुनने में असफल रही तो टाटा का कार्यकाल बढ़ाया भी जा सकता है।
सूत्रों ने कहा कि समिति जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करेगी और इस बार टाटा समूह के नए प्रमुख का चुनाव करने में अतिरिक्त सावधानी बरतेगी। इसलिए यदि जरूरत पड़ी, तो रतन टाटा का कार्यालय चार महीने से आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
टाटा समूह द्वारा रतन टाटा के वारिस के तौर पर सायरस मिस्त्री का चुनाव परेशान करने वाला साबित होने के बाद समूह के बहुमत शेयरधारक नए चेयरमैन का चुनाव करने में बेहद सावधानी बरत रहे हैं। ‘दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है’ वाली कहावत रतन टाटा और टाटा संस के बहुमत शेयरधारक ट्रस्टों के सदस्यों पर इस मामले में बिल्कुल फिट बैठता है।
टाटा समूह से जुड़े उद्योग सूत्रों के मुताबिक इस बार ट्रस्टी किसी ऐसे उम्मीदवार को चुनना पसंद करेंगे, जिन्होंने कंपनी में सराहनीय प्रदर्शन किया है और जो समूह के मूल्यों का तो समझते ही हैं, उन्हें अपने जीवन-व्यवहार में अमल भी करते हैं।