संघ की प्रतिनिधि की रिपोर्ट के हवाले से यह भी कहा गया कि सांप्रदायिक उन्माद, रैलियों, प्रदर्शनों, संविधान की आड़ में सामाजिक अनुशासन का उल्लंघन, रीति-रिवाजों और परंपराओं और धार्मिक स्वतंत्रता को उजागर करने वाली नृशंस कृत्यों का सिलसिला बढ़ रहा है, मामूली कारणों को भड़काकर, अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक में वार्षिक रिपोर्ट पढ़ी गई, जिसमें देश में धार्मिक कट्टरपंथ को गंभीर चुनौती बताया गया। कहा गया कि केरल, कर्नाटक में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं की निर्मम हत्याएं इस खतरे का एक उदाहरण हैं।
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रिपोर्ट के हवाले से यह भी कहा गया कि सांप्रदायिक उन्माद, रैलियों, प्रदर्शनों, संविधान की आड़ में सामाजिक अनुशासन का उल्लंघन, रीति-रिवाजों और परंपराओं और धार्मिक स्वतंत्रता को उजागर करने वाली नृशंस कृत्यों का सिलसिला बढ़ रहा है, मामूली कारणों को भड़काकर, अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। कर्नाटक के शिवमोगा में 20 फरवरी की रात बजरंग दल के 26 वर्षीय कार्यकर्ता हर्ष की हत्या पर भी नाराजगी जताई गई।
धर्मांतरण पर लगाम लगाने पर भी मंथन
संघ की शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ मुस्लिमोें के साथ ही अन्य अल्पसंख्यक समुदायों में पैठ बनाने की रणनीति तैयार कर रहा है। शताब्दी वर्ष तक संगठन के आधार को और विस्तार देने की तैयारी की गई है। संघ सूत्र के मुताबिक जिस प्रकार कुछ वर्ष पहले अल्पसंख्यक मुसलमानों में पैठ बना कर विस्तार की योजना तैयार की गई थी, उसी प्रकार कुछ अन्य अल्पसंख्यकों के बीच पैठ बनाने की योजना है। संघ प्रमुख मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की उपस्थिति में हो रही है।
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शाखाओं की संख्या बढ़ेगी, एक दर्जन नए क्षेत्रों का चयन
रिपोर्ट में विभिन्न क्षेत्रों में संघ की स्थिति का आकलन किया गया है। शाखा की संख्या बढ़ाने के उपाय सुझाए गए हैं। संगठन विस्तार के लिए संघ से सभी वर्गों को जोड़ने के लिए भी कई सुझाव दिए गए हैं। विस्तार के लिए करीब एक दर्जन नए क्षेत्रों का चयन किया गया है। बैठक के पहले दिन सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य ने बताया कि संघ की शाखाओं में स्कूल और छात्राओं की रुचि बढ़ रही है।
देश भर में चलने वाले करीब 60 हजार शाखाओं में छात्रों की हिस्सेदारी 61 फीसदी है। कोरोना महामारी संबंधी प्रतिबंधों में छूट के बाद 97.5 फीसदी शाखाओं ने फिर से सक्रिय हो गए हैं। देश के 2303 शहरों में से 44 प्रतिशत में मौजूद शाखाएं बताती है कि हमारा प्रसार बढ़ रहा है।
मध्य भारत-बंगाल में ज्यादा रुचि
वैद्य ने इस दौरान साल 2017 से 2021 के बीच चलाए गए संघ में शामिल हो अभियान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में मध्य भारत और पश्चिम बंगाल के लोगों ने अन्य क्षेत्रों की तुलना में संघ में सक्रिय हिस्सेदारी के लिए अधिक अनुरोध भेजे। संघ की योजना शताब्दी वर्ष तक सभी मंडलों में शाखाएं स्थापित करने की है।