किसान आंदोलन की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। किसानों के साथ-साथ जातीय पंचायतों के सरकार के खिलाफ हो जाने से समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। जिस प्रकार हरियाणा की खाप पंचायतें भाजपा के खिलाफ एकजुट हो रही हैं, माना जा रहा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। मुजफ्फरनगर, मथुरा और बागपत की पंचायतों में उमड़ी किसानों की भारी भीड़ इसी बदलाव का संकेत भी दे रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसान आंदोलन के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 100 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर सीधा असर पड़ सकता है।
समाजवादी पार्टी नेता जूही सिंह ने अमर उजाला से कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के हितों से समझौता करके जनता के बीच अपना विश्वास खो दिया है। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने इस आंदोलन को किसानों के साथ मिलजुल कर संभालने की बजाय उनकी बिजली-पानी काटने और उन पर कठोरता दिखाने का काम किया है। इससे किसानों के साथ-साथ अन्य वर्गों में भी सरकार के लिए गुस्सा बढ़ा है। यही कारण है कि सभी वर्ग साथ आकर अब भाजपा सरकार से मुक्ति चाहते हैं और लोगों की यही सोच प्रदेश में बदलाव का कारण बनेगी।
जूही सिंह ने कहा कि भाजपा ने पिछली बार दूसरी सरकारों की खामियां दिखा कर सत्ता पाई थी। लेकिन इस बार उसे अपने कामों का हिसाब देना है। परंतु आज उसके खाते में किसानों की दुर्दशा, सांप्रदायिक राजनीति के कारण विशेष वर्ग का गुस्सा और युवाओं-छात्रों की बेरोजगारी है। अब उसे बताना है कि वह किस मॉडल को दिखाकर जनता के बीच समर्थन मांगती है। उन्होंने विश्वास जताया कि समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल का गठबंधन इस चुनाव में बेहद महत्वर्ण भूमिका निभाएगा।
चौधरी अजित सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल की पूरी राजनीति किसानों के सहारे ही आगे बढ़ी है। यही कारण है कि केंद्र सरकार से किसानों की नाराजगी आरएलडी को नए अवसर की तरह दिखाई पड़ रही है। पार्टी नेता जयंत चौधरी लगातार किसानों की पंचायत कर माहौल को अपने पक्ष में जोड़ने में जुटे हैं। मुजफ्फरनगर में हुई किसानों की विशाल महापंचायत पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बन गई। कहा जा रहा है कि अब जाटों ने छोटे चौधरी को एक बार फिर समर्थन देने की बात कहनी शुरू कर दी है। अगर जाटों, किसानों और मुसलमानों का परंपरागत वोट छोटे चौधरी के पक्ष में मुड़ जाता है, तो आरएलडी प्रदेश की राजनीति में मजबूत वापसी कर सकती है।
उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता मनीष शुक्ला कहते हैं कि खेतों में काम करने वाला असली मेहनतकश किसान आज भी भाजपा के साथ है। इस किसान ने देखा है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने देश में पहली बार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों को सीधी आर्थिक मदद देने की शुरुआत की है। अब किसानों को 35 फीसदी फसल की बर्बादी होने पर भी पूरा फसल बीमा का लाभ मिलता है और उन्हें यूरिया-डाई के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता।
मनीष शुक्ला के मुताबिक नए कृषि कानून किसानों के हित में हैं। इनके लागू होने से इसका सकारात्मक असर समझ में आएगा और अंततः किसानों का समर्थन भाजपा को ही मिलेगा। उन्होंने कहा कि किसानों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा है और वे इस भरोसे को कभी कमजोर नहीं होने देंगे।
सपा-आरएलडी के संभावित गठबंधन पर भाजपा नेता ने कहा कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी से बड़ा कोई दूसरा गठबंधन नहीं हुआ है। अगर सपा-बसपा का गठबंधन उत्तर प्रदेश में कामयाब नहीं हुआ, तो सपा-आरएलडी का गठबंधन भी कामयाब नहीं होगा क्योंकि जनता समझती है कि ये गठबंधन अवसरवादी है, जिसका जनता के हितों से कोई लेना-देना नहीं है।