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दुर्लभ मामला: छोटी आंत तक पहुंच रहा ब्लैक फंगस, स्टेरॉयड न लेने वाला भी हुआ संक्रमित

Sun, 23 May 2021 02:56 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

  • दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में सामने आए एक साथ दो ब्लैक फंगस के दुर्लभ मामले
  • दोनों मरीजों को पहले पेट में हुआ दर्द, फिर हालत बिगड़ने पर कराया अस्पताल में भर्ती
  • बायोप्सी के जरिये दोनों मरीजों में ब्लैक फंगस की हुई पुष्टि, डॉक्टरों ने किया सचेत
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ब्लैक फंगस (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आंख, नाक और सिर के अलावा ब्लैक फंगस छोटी आंत तक पहुंच सकता है। साथ ही स्टेरॉयड न लेने वालों को भी यह संक्रमण हो सकता है। शनिवार को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल ने दो दुर्लभ ब्लैक फंगस मरीजों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह दोनों मरीज मधुमेह ग्रस्त हैं लेकिन इनमें से केवल एक ने ही स्टेरॉयड युक्त दवा ली थी।

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जबकि दोनों मरीजों के पेट में हल्का दर्द होना शुरू हुआ था और हालत बिगड़ने पर इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से एक मरीज की हालत काफी गंभीर हो गई जिसके चलते उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर लेना पड़ा।

पेट दर्द के लक्षण भी शामिल
डॉक्टरों के अनुसार ब्लैक फंगस छोटी आंत में भी पहुंच सकता है। इसकी पहचान सीटी स्कैन के अलावा बायोप्सी के जरिये ही संभव हो सकती है। इन दोनों ही मामलों में बायोप्सी के आधार पर ही अंदर ब्लैक फंगस का पता चला था। अभी तक कोरोना संक्रमित या इससे ठीक हुए लोगों में चेहरे पर सूजन, दांत में दर्द, सिर दर्द जैसे लक्षणों को ब्लैक फंगस से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन अब पेट दर्द के लक्षण भी इसमें शामिल हैं।
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गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. उषास्त धीर ने बताया कि दिल्ली निवासी 56 वर्षीय कुमार के परिवार में अब तक कोरोना से तीन लोगों की मौत हो चुकी है। पत्नी का अंतिम संस्कार करने के बाद इन्हें खुद के संक्रमित होने का पता चला। इस दौरान इन्हें पेट दर्द और एसिडिटी होने लगी तो इन्होंने घर पर ही दवाओं का सेवन किया, लेकिन तीन दिन बाद हालत बिगड़ने लगी।

अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचने पर सीटी स्कैन से पता चला कि उसकी छोटी आंत में छेद हो गया था, लेकिन तब तक वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर चले गए थे। डॉ धीर के अनुसार छोटी आंत के पहले भाग में अल्सर देखने के बाद उन्हें शक हुआ। उन्होंने तत्काल एंटिफंगल उपचार शुरू कर दिया और सर्जरी के जरिए निकाले आंत के हिस्से को बायोप्सी के लिए भेज दिया था जिसकी रिपोर्ट ने चौंका दिया।

ठीक ऐसा ही एक मामला अस्पताल के डॉ. पीयूष रंजन के पास आया। 68 वर्षीय एजाज खुश थे कि उनका परिवार संक्रमण से बाहर आ रहा है, लेकिन पेट में हल्का दर्द होने लगा। मधुमेह ग्रस्त होने के साथ स्टेरायॅड भी लिया था। उन्हें बुखार और दर्द बहुत हल्का था। उनकी नैदानिक परीक्षा में भी आंतों की वेध के कोई लक्षण नहीं दिखे लेकिन संदेह के चलते तत्काल सीटी जांच की तो पता चला कि छोटी आंत में ब्लैक फंगस है। इसके बाद बायोप्सी में और अधिक पुष्टि हुई।

डॉक्टरों के अनुसार ये दोनों मरीज मधुमेह ग्रस्त थे, लेकिन इनमें से केवल एक ने ही स्टेरॉयड लिया था। इसलिए यह कहना है कि सिर्फ स्टेरॉयड लेने से ब्लैक फंगस हो सकता है, यह पूरी तरह से गलत है।

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