सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को कहा, सिर्फ कोरोना के अंदेशे के आधार पर सभी मामलों में जमानत नहीं दी जा सकती। जमानत के लिए अपराध का स्वरूप और उसकी गंभीरता पर विचार करना जरूरी होता है।
जस्टिस विनीत शरण व जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ की ने ये टिप्पणी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ एक होटल मालिक द्वारा दायर अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। होटल मालिक पर अपने परिसर का इस्तेमाल वेश्यावृत्ति के लिए करने का आरोप है। हाईकोर्ट के अग्रिम जमानत देने से इनकार के बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
सरकारी अभियोजक ने हाईकोर्ट के समक्ष कहा था कि एक गुप्त सूचना के आधार पर होटल में छापामारी की गई। पुलिस ने वहां से उज्बेकिस्तान की दो युवतियों समेत 14 लोगों को गिरफ्तार किया था। होटल मालिक मौके से भागने में सफल रहा था।
अभियोजक की ओर से कहा गया था कि इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए याचिकाकर्ता को हिरासत में लेकर पूछताछ जरूरी है। जिसके बाद हाईकोर्ट ने उसे अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में होटल मालिक के वकील ने कहा, जिन दो महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है उनमें से एक उसकी पत्नी है जबकि दूसरी उसकी होटल की रिसेप्शनिस्ट है। साथ ही यह भी दलील दी गई कि अभी कोरोना महामारी का समय है इसलिए उसे अग्रिम जमानत दी जाए।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, तो यहां भी कोविड आ गया। मामला अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम का है। होटल से 14 कस्टमर पकड़े गए। कोरोना सभी चीजों का समाधान नहीं है।
पीठ ने याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को तत्काल समर्पण करने के लिए कहा है। कोर्ट ने मोहाली के एसएसपी को निर्देश दिया है कि अगर याचिकाकर्ता समर्पण नहीं करता है तो उसकी गिरफ्तारी के लिए उचित कदम उठाए जाएं। कोर्ट ने एसएसपी को एक हफ्ते में अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।