राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली के मुख्य सचिव और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी किया है। आयोग ने यह नोटिस दिल्ली के सरकारी स्कूल में नाबालिग छात्रा के साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामले में जारी किया है। आयोग ने मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है।
दिल्ली के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली छह वर्षीय बच्ची के साथ स्कूल के ही इलेक्ट्रिशियन पर यौन दुराचार का मामला सामने आने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया। आयोग ने पाया कि यदि बच्ची के साथ यौन हिंसा हुई है, तो पीड़िता के मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला है।
आयोग ने इस मामले में दिल्ली के मुख्य सचिव और दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी करते हुए 4 हफ्तों में इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। आयोग ने मुख्य सचिव से पूछा है कि क्या छात्रों की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों द्वारा जारी किए गए सभी दिशानिर्देश/ निर्देशों का दिल्ली के स्कूलों में पूर्णतया पालन किया जा रहा है या नहीं।
आयोग ने यह भी पाया कि चूंकि मामला एक सरकारी स्कूल में हुआ है, और खासकर छात्राओं की सुरक्षा के लिए छात्रों के सरंक्षक होने के नाते स्कूल के अधिकारी जिम्मेदार हैं। आयोग के मुताबिक पहली नजर में स्कूल प्रशासन लापरवाही के लिए दोषी है।
साथ ही आयोग ने कहा कि दिल्ली में बढ़ रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों पर राज्य मानवाधिकार आयोग बनाए जाने की जरूरत है। और जब तक यह अस्तित्व में आएगा, आयोग दिल्ली से जुड़े मामलों पर संज्ञान लेता रहेगा।
गौरतलब है कि उसी स्कूल में इलेक्ट्रिशियन का काम करने वाला कर्मचारी स्कूल से घर लौट रही छात्रा का मुंह दबाकर पम्प के पास ले गया था। इसके बाद आरोपी ने वारदात को अंजाम दिया। गुरुवार को यह घटना हुई। आरोपी ने छात्रा को धमकी दी कि इस बारे में किसी को न बताए। मेडिकल परीक्षण में छात्रा के साथ यौन हिंसा की पुष्टि हुई है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।