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भारत ने ताशकंद समझौते में लौटा दी थी पोस्ट, यहीं से उड़ी में घुसे आतंकवादी

Wed, 21 Sep 2016 06:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : ‌हर‌िंदर पाल
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मेरठ के शेर मेजर रणवीर सिंह ने 1965 की लड़ाई में भारत की झोली में हाजी पीर (अब पाकिस्तान में) की पोस्ट डाल दी थी। मेजर रणवीर रण के असल वीर थे। कई मोर्चों पर उन्होंने दुश्मनों के छक्के छुड़ाए। उनकी वीरता को आज याद करने की दो बड़ी वजह हैं। पहली यह कि आज उनका शहादत दिवस है। 51 साल पहले युद्ध के मैदान में पाकिस्तानियों को पीछे खदेड़ते हुए उन्होंने प्राण न्यौछावर कर दिए थे।
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दूसरी कश्मीर में उड़ी में आर्मी कैंप पर जो आतंकवादी हमला हुआ, वहां तक भारत सेना का कब्जा दिलवाने वाले मेजर रणवीर थे। भारत ने अगर हाजी पीर पोस्ट पाकिस्तान को वापस नहीं की होती तो उड़ी में दहशतगर्द सेना पर हमला नहीं कर पाते। बागपत जिले के नांगल गांव के मूल निवासी मेजर रणवीर सिंह के अदम्य साहस से सेना वाकिफ है। तब नांगल गांव मेरठ जिले में होता था।

मेजर रणवीर सिंह की पत्नी सुरेंद्र कुमारी और बेटा डॉ. राजीव सिंह डिफेंस कॉलोनी में रहते हैं। उन्होंने पढ़ाई जाट कॉलेज बड़ौत से की। मेजर रणवीर सिंह 1962 और 1965 की लड़ाई लड़ी। 65 की लड़ाई में वह जंग के मैदान में दुश्मनों को पीछे धकेलते हुए 21 सितंबर को शहीद हुए थे। उनकी वीरता की वजह से उन्हें सेना मेडल से नवाजा गया। एक अप्रैल 1964 को मेरठ में 19 पंजाब रेजीमेंट स्थापित की गई। वह यहां रेजीमेंट के पहले कमांडिंग ऑफिसर बने।
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30 जवानों ने 100 पाकिस्तानी सैनिक मारे

जब हाजी पीर पोस्ट पर कब्जा किया
1965 में कच्छ के क्षेत्र से पाकिस्तान से लड़ाई शुरू हुई। पाकिस्तान ने पांच अगस्त को अपने 30 हजार सैनिक सिविल ड्रेस में ऑपरेशन जिबरॉल्टर के तहत भारत की तरफ बढ़ा दिए। वह हथियारों से लैस थे। मेजर रणवीर सिंह ने अपनी रेजीमेंट के साथ मोर्चा संभाला और युद्ध में हाजी पीर पोस्ट पर कब्जा जमाया। उड़ी चोटी फतह करते हुए 13 हजार फुट ऊंचाई पर हाजी पीर पोस्ट पर तिरंगा फराह दिया।

बाद में ताशकंद के समझौते में हाजी पीर पोस्ट पाकिस्तान को लौटा दी गई। इसका भौगोलिक नुकसान यह हुआ कि उड़ी से पुंज का रास्ता जो पहले 35 किमी था वह 271 किमी हो गया। पाकिस्तान हाजी पीर पोस्ट को आतंकवादियों को लांच करने में इस्तेमाल करता है। 

यह मेजर रणवीर सिंह के साहस का परिचय है कि उन्होंने अपने 30 जवानों के साथ मोर्चा संभालते हुए 100 पाकिस्तानी सैनिक मार गिराए थे। उनकी दो स्टेन गन छीनकर लेकर आए थे। लड़ाई के दौरान जब मेजर रणवीर आगे बढ़ रहे थे तो उन्हें 100 पाक सैनिक एक मोर्चे पर नजर आए।

इससे पहले कि पाक सैनिक कुछ समझ पाते मेजर रणवीर अपनी टुकड़ी के साथ उन पर टूट पड़ी और सब मार गिराए। इस साहसिक फैसले ने पूरी सेना में उन्हें चर्चित कर दिया था।
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जब आई शहादत की खबर

- फोटो : File Photo
अपने 40 जवानों को बचाया 
1962 में चीन से युद्ध के दौरान मेजर रणवीर अपने टुकड़ी के साथ नामचा घाटी में चीनी सैनिकों से घिर गए थे। लेकिन वह हमलावर होकर वहां से 45 सैनिक के साथ सुरक्षित निकल आए थे। नेफा और भूटान होते हुए करीब 18 दिन बाद वह अपनी तेजपुर यूनिट पहुंचे। पांच साथी रास्ते में शहीद हो गए।

तब तक उनकी शहादत का टेलीग्राम भेजा चुका था। पत्ता का रस चूसकर वह लोग जिंदा रहे। मेजर रणवीर जब अपने गांव पहुंचे तो उन्होंने यह किस्सा सुनाया।

मेजर रणवीर की पत्नी सुरेंद्र कुमारी बताती हैं लड़ाई के दौरान उन्हें मेजर साहब ने छह पत्र लिखे। जंग के दौरान रोज टेलीग्राम आता था। यूनिट को बता रखा था कि जब तक हम रहें तो ऑल वेल लिखकर टेलीग्राम करते रहना। एक सप्ताह तक टेलीग्राम नहीं आया तो चिंता हुई। 27 सितंबर को उनकी शहादत का टेलीग्राम आया।
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