सीबीआई मामले में हस्तक्षेप को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि पीएम की भूमिका संदेह के घेरे में है। प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि पूरा देश चाहता है कि भ्रष्टाचार के जो गंभीर आरोप सीबीआई के आला अधिकारियों व रिसर्च एनालिसिस विंग के आला अधिकारियों पर लगे हैं उनकी निष्पक्ष जांच और पटाक्षेप हो। जबकि प्रधानमंत्री गैरकानूनी और असंवैधानिक तरीके से सीबीआई ओर रॉ प्रमुख को घर बुलाकर उस तफ्तीश में दखल अंदाजी कर रहे हैं।
कांग्रेस ने पीएम से सवाल पूछा है कि क्या कारण है कि सोमवार को पीएम ने सीबीआई प्रमुख और रॉ प्रमुख को अपने घर बुलाया। सुरजेवाला ने कहा कि क्या ये भ्रष्टाचार के मामले की तफ्तीश हो रही है। क्या यह रॉ और सीबीआई के अधिकारियों के खिलाफ उस जांच पर असर डालने की साजिश नहीं है। पीएम बताएं कि किसी मामले में चल रही जांच में पीएम गैर कानूनी और असंवैधानिक दखल नहीं दे रहे हैं।
दूसरा सवाल क्या सीवीसी की भूमिका संदेह के घेरे में नहीं है क्योंकि सीवीसी अपनी कानूनी जिम्मेवारियों का निर्वहन करने की बजाए पूरे मामले पर चुप्पी क्यों साधे है। भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने से क्या सीवीसी को भी कोई राजनीतिक व्यक्ति हिदायत दे रहा है। पीएम बारी-बारी एनआईए, सीबीडीटी, इनकमटैक्स, सीबीआई और ईडी को बारी-बारी सुनियोजित तरीके से छेड़छाड़ क्यों कर रहे हैं।
सुरजेवाला ने कहा कि पीएम सीबीआई और सभी प्रमुख जांच एजेंसियों को षड़यंत्रकारी तरीके से बंधक बनाकर उनकी स्वायत्तता को खत्म कर रहे हैं। अगर सीबीआई और रॉ ही भ्रष्टाचार के घेरे में रहेंगे, तो देश में अपराधियों की जांच कौन करेगा। पिछले 53 महीने से लगातार सीबीआई का इस्तेमाल राजनीतिक द्वेष के लिए किया जा रहा है।
मध्यप्रदेश के व्यापम भ्रष्टाचार में सीएम शिवराज सिंह चौहान पर आरोप लगे थे एक्सेल शीट के मामले में सीबीआई ने क्यों उन्हें क्लीनचिट दे दी। करोड़ों के बैंक फ्राड में मेहुल चोकसी और नीरव मोदी की जो सीबीआई अधिकारी राजीव सिंह जांच कर रहे थे पहले उनका तबादला किया फिर सीबीआई से हटा दिया। सीबीआई के तीन आलाधिकारी नीना सिंह, अनीश प्रसाद ओर के गोपाल कृष्णराव का ट्रांसफर कर उन्हें भी सीबीआई से हटा दिया जबकि वे नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और रायन स्कूल मर्डर केस की जांच कर रहे थे।
एक विशेष अधिकारी को जिनकी भूमिका गोधरा एसआईटी के प्रमुख के तौर पर संदेह के घेरे में थी बावजूद भी उसे सीबीआई में लाया गया। सीबीआई के एक विशेष अधिकारी इस साल 4 अगस्त को लंदन की एक अदालत में विजय माल्या के साथ हंसी मजाक करते और हाथ मिलाते देखे गए। प्रधानमंत्री कार्यालय में मौजूद एक विशेष अधिकारी की भूमिका जब कोल स्कैम के संबंध में संदेह के घेरे में आई तो बजाए उन्हें आरोपी की जगह सीबीआई पर दबाव डाल कर गवाह बना लिया गया।