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रेनबैक्सी विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने सिंह भाइयों से पूछा, कैसे चुकाओगे 3500 करोड़ रुपये

Fri, 15 Mar 2019 04:27 AM IST
Avdhesh Kumar एजेंसी, नई दिल्ली
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शिवइंदर मोहन सिंह और मलविंदर मोहन सिंह - फोटो : PTI
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सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को रेनबैक्सी के पूर्व प्रमोटरों मालविंदर सिंह और शिविंदर सिंह से पूछा कि वे सिंगापुर ट्रिब्यूनल की तरफ से उन्हें दिए गए 3500 करोड़ रुपये चुकाने के आदेश को कैसे पूरा करेंगे? शीर्ष अदालत ने सिंह भाइयों के नाम से मशहूर फोर्टिस हेल्थकेयर के भी पूर्व मालिकों को 28 मार्च तक अपनी योजना दाखिल करने के आदेश दिए। साथ ही यह भी कहा कि आशा है, यह अदालत के सामने आपकी पेशी का आखिरी मौका होगा।
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चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद सिंह भाइयों से कहा कि वे अपने आर्थिक व कानूनी सलाहकारों से चर्चा करने के बाद एक मजबूत योजना पेश करें, जिसमें स्पष्ट तौर पर बताया गया हो कि वे ट्रिब्यूनल के आदेश को कैसे पूरा करेंगे। पीठ ने कहा, यह व्यक्तिगत सम्मान की बात नहीं है, लेकिन यह देश के सम्मान के लिए अच्छा नहीं है। चीफ जस्टिस के साथ जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की मौजूदगी वाली पीठ ने कहा, आप देश के फार्मा उद्योग के अग्रणी लोगों में शुमार हैं और यह अच्छा नहीं लगता कि आप अदालत में पेश हो रहे हैं।

क्या है पूरा मामला

शीर्ष अदालत बृहस्पतिवार को जापानी कंपनी दायची सैंक्यो की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सिंह भाइयों को सिंगापुर ट्रिब्यूनल की तरफ से दिए गए 3500 करोड़ रुपये चुकाने का आदेश देने का आग्रह शीर्ष अदालत से किया गया था। दायची ने 2008 में रेनबैक्सी का अधिग्रहण किया था, जिसके बाद उसने सिंह भाइयों पर सौदे के दौरान कंपनी पर अमेरिका में हुई कार्रवाई की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया था और सिंगापुर आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल की थी। 
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इसी मामले में ट्रिब्यूनल ने सिंह भाइयों को दायची को 3500 करोड़ रुपये चुकाने का आदेश दिया था, लेकिन वह इसे नकार रहे थे। दायची ने बाद में अमेरिकी न्याय विभाग से 50 करोड़ डॉलर में समझौता कर लिया था। बाद में दायची ने 2015 में रेनबैक्सी को 22,679 करोड़ रुपये में सन फार्मास्यूटिक्लस को बेच दिया था।

लगाई हुई है अवमानना याचिका भी

जापानी कंपनी दायची ने दोनों भाइयों के खिलाफ शीर्ष अदालत में अवमानना याचिका लगाई हुई, जिसमें कहा गया था कि उसे फोर्टिस हेल्थकेयर के शेयरों में हिस्सेदारी देने का वादा किया गया था। पीठ ने दायची के आग्रह पर पहले फोर्टिस के शेयर मलेशियाई आईआईएच हेल्थकेयर बरहाद को बेचने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन पिछले साल 14 दिसंबर को शीर्ष अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। 

फोर्टिस में 4000 करोड़ रुपये के निवेश से 31.1 फीसदी शेयर खरीदकर आईआईएच इस कंपनी पर अपना नियंत्रण बनाने की तैयारी में है। इस प्रस्ताव को पिछले साल जुलाई में फोर्टिस हेल्थकेयर का बोर्ड मंजूरी दे चुका है।
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