जवाहर बाग का मास्टर माइंड रामवृक्ष तीन हजार लोगों का पूरा खर्चा यूं ही नहीं उठा रहा था। उसके उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़ के नक्सलियों से संबंध थे और वहां से लाखों की रकम हर माह उसके लिए आती थी। जवाहर बाग में रहने वाले कब्जाधारियों को वह कमांडर की तरह निर्देशित करता था।
रविवार को अपराह्न तीन बजे अलीगढ़ कमिश्नर चंद्रकांत के निरीक्षण के बाद जवाहर बाग में पत्रकारों को प्रवेश दिया गया। अंदर भंडार गृह में पुलिस को एक भीगा हुआ मोटा रजिस्टर मिला। उसमें रामवृक्ष यादव और उसकी आजाद हिंद सरकार को मिलने वाली आर्थिक मदद और खर्चे का पूरा विवरण है।
इसमें उड़ीसा के रंगलाल राठौर से हर माह 22 लाख रुपये मिलना अंकित है। बनारस के नारायण सिंह से 10 लाख, कन्नौज के मानसिंह से सात लाख और उन्नाव के एक व्यक्ति से आठ लाख रुपये से अधिक की राशि मिलने का विवरण भी इसमें है।
इसके अलावा नक्सल प्रभावित जनपदों में उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़, सारडाह की पहाड़ियों में स्थित नक्सल प्रभावित इलाके के दर्जनों लोगों के नाम और लाखों की राशि भंडारे के नाम आने का विवरण भी अंकित है।
रजिस्टर में राशि लाने वालों के संगत सेवादारों और इलाका प्रमुखों का पदनाम दिया गया है। रजिस्टर में 20 से अधिक पन्नों में भंडारे और अन्य खर्चे अंकित हैं। इसमें जवाहर बाग में लगवाई गई तिरपाल पर 10 लाख से अधिक का खर्चा होना अंकित है।
तीन हजार से अधिक का रोज बनता था खाना
यहां रहने वाले लोगों के खाने-पीने और कपड़ों आदि का पूरा खर्चा रामवृक्ष यादव ही वहन करता था। एक बार में तीन हजार लोगों का खाना बनता था। एक-एक हजार लोगों को पंगत बनाकर खाना खिलाया जाता था।
पजेरो में करता था सवारी
पांच से सात गाड़ियों के काफिले में 24 से अधिक लोग साथ होते थे
- फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
जवाहर बाग का मास्टर माइंड रामवृक्ष यादव 22 लाख की पजेरो गाड़ी में बाहर निकलता था। साथ में पांच से सात गाड़ियों के काफिले में 24 से अधिक लोग साथ होते। जवाहर बाग में हुई आगजनी में 20 से अधिक वाहन जल गए। इनमें 10 जीप, कार, ट्रक, ट्रैक्टर, टेंपो, मिनी ट्रक और बाइक शामिल हैं।
पेड़ पर बांस की चारपाई बना कर बनाए थे आशियाने
रामवृक्ष यादव अपनी टीम को पूरे तरीके से नक्सली ट्रेनिंग देता था। इसके लिए उसने जवाहरबाग में पेड़ों पर बांस बल्ली की चारपाई बनाकर रहने तक के अशियाने बना रहे थे। अब वे आशियाने आग में जलकर थोड़े बहुत अवशेष बचे हैं। जले हुए बांस बल्ली व लाठी डँडों का ढ़ेर पड़ा हुआ है।
रोज सुबह होती थी सुभाष प्रार्थना व ट्रेनिंग
रामवृक्ष यादव अपनी टीम के लोगों को रोजाना सुबह प्रार्थना सभा के बाद ट्रेनिंग देता था। इसमें लाठी से वार करना व हर समय लाठी में नीला झंडा लगाए लोगों को रखने की आदत में शुमार कराता था।