एनडीए ने राष्ट्रपति पद के लिए रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार बनाकर अपना दांव चल दिया है। कोविंद का नाम सामने आने के बाद जहां कुछ दलों ने उन्हें समर्थन देने की घोषणा भी कर दी है वहीं विपक्ष अभी तक असमंजस में फंसा है। हालांकि कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें कोविंद का नाम पसंद नहीं आया तो कुछ उनकी पृष्ठभूमि को लेकर आपत्ति जता रह हैं।
हालांकि हकीकत ये है कि आरोपों से इतर रामनाथ कोविंद योग्यता के पैमाने पर कहीं से भी कमजोर नजर नहीं आते हैं। न शैक्षिक योग्यता में और न ही प्रशासनिक पैमाने पर ही उनकी योग्यता को कठघरे में खड़ा किया जा सकता है। हालांकि हमेशा से सुर्खियों से दूर रहने वाले कोविंद कभी ग्लैमराइज चेहरा नहीं रहे इसलिए कम ही लोगों को उनकी योग्यताओं और काबिलियत की जानकारी है।
आइए हम आपको बताते हैं कोविंद की ऐसी ही पांच खूबियों के बारे में जिन्हें जानकर आप भी मानेंगे कि राष्ट्रपति पद के लिए वह तमाम मापदंडों पर खरे उतरते हैं।
शैक्षिक योग्यता
राष्ट्रपति पद जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए सबसे जरूरी है उचित शैक्षिक योग्यता का होना। हालांकि संविधान के अनुसार देश का कोई भी व्यक्ति जो स्नातक है वह राष्ट्रपति बनने की पात्रता रखता है, लेकिन यह भी सच है कि आज तक इस पद पर रहे तमाम लोग उच्च शिक्षित रहे हैं। इन्हीं मापदंडों पर कोविंद खरे तरते हैं। वह कानून में स्नातक हैं और लंबे समय तक सुप्रीम कोर्ट में वकालत की है। गवर्नर्स ऑफ इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कोलकाता के भी सदस्य रहे हैं। इसके अलावा वह लखनऊ के डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के भी सदस्य हैं।
अंतरराष्ट्रीय अनुभव
राष्ट्रपति कई मौकों पर दूसरे देशों में भारत के प्रतिनिधि के तौर पर शिरकत करते हैं ऐसे में उन्हें अंतरराष्ट्रीय संबंधों और विदेश नीति का अच्छा जानकार होना भी जरूरी है। इस मापदंड पर भी कोविंद खरे उतरते हैं, वह राज्यसभा सदस्य रहने के दौरान कई कमेटियों में सदस्य रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने थाईलैंड, नेपाल, पाकिस्तान, सिंगापुर, स्विटजरलैंड, फ्रांस, अमेरिका और इंग्लैंड की यात्राएं की हैं। ऐेसे में अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और संबंधों पर भी उनका अनुभव अच्छा खासा है। यहां तक की वह साल 2002 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को भी संबोधित कर चुके हैं।
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संविधान की अच्छी जानकारी
16 साल तक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने की वजह से कोविंद को कानून का अच्छा जानकार माना जाता है। 12 साल तक वह राज्यसभा के सांसद रहने के दौरान आधा दर्जन कमेटियों के भी सदस्य रहे हैं। ऐसे में देश के संविधान पर भी उनकी अच्छी पकड़ है। दलितों से जुड़े कई मुद्दों पर वह उनके हक के लिए लड़ते रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रपति पद जैसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए उनकी यह योग्यता तमाम पैमानों पर खरी उतरती है।
लो प्रोफाइल रहना
कभी भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रमुख दलित चेहरा रहे रामनाथ कोविंद ने हमेशा खुद को लाइमलाइट से दूर रखा। यहां तक की जब उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया तब भी वह सुर्खियों में आने से बचते थे। वर्तमान में जहां तमाम पार्टियों के प्रवक्ता टीवी पर आने के लिए लालायित रहते हैं तब शायद ही किसी ने कोविंद का चेहरा किसी टीवी बहस या कार्यक्रम में देखा हो।
मजबूत व्यक्तित्व
लो प्रोफाइल रहने वाले रामनाथ कोविंद को मजबूत व्यक्तित्व का नेता माना जाता है। बचपन से ही उन्होंने जीवन में तमाम संघर्ष देखे और उनसे पार पाकर आगे बढ़े। कई मौकों पर वह पार्टी की नीतियों से इतर भी मजबूती से अपनी बात रखते नजर आए। यहां तक की जब पूर्व की केंद्र सरकार ने सरकारी नौकरियों में पदोन्नतियों में आरक्षण पर कैंची चला दी थी तब कोविंद ने उसके खिलाफ अभियान भी चलाया। दलित हितों के लिए उन्होंने लंबा संघर्ष किया है।