सपा में चरम पर पहुंचे आंतरिक कलह के बीच पार्टी से निष्कासित किए गए वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव का लोधी स्टेट स्थित सरकारी आवास ने वार रूम का रूप ले लिया है। निष्कासन के बाद से ही अपने निवास में जमे रामगोपाल से मिलने समर्थकों की भीड़ उनके आवास पर सुबह से ही जमा हो रही है। सपा के पूर्व महासचिव बीते तीन दिनों से फोन के माध्यम से अपने करीबी नेताओं के संपर्क में हैं। समर्थकों को भरोसा है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रामगोपाल की कीमत पर किसी के समक्ष नहीं झुकेंगे। दोनों गुटों के अपने अपने कड़े रुख पर कायम रहने के कारण उनके निवास पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। हल न निकलने की स्थिति में भविष्य की रणनीति का तानाबाना भी बुना जा रहा है। एक चर्चा यह भी है कि विवाद का हल न निकलने की स्थिति में सूबे में रालोद, कांग्रेस और अखिलेश गुट का गठबंधन उभर सकता है।
राज्य में नया गठबंधन संबंधी सवाल के जवाब में पार्टी के एक वरिष्ठï नेता ने कहा कि फिलहाल यह साफ है कि इस लड़ाई में अखिलेश पीछे नहीं हटेंगे। विवाद तभी टलेगा जब शिवपाल पीछे हटेंगे। अगर वह भी अपने पुराने रुख पर कायम रहे तो निश्चित रूप से राज्य में नया राजनीतिक समीकरण सामने आएगा। उक्त नेता ने स्वीकार किया कि इस दिशा में न सिर्फ गंभीर मंथन हो रहा है, बल्कि संपर्क भी साधा जा रहा है। हालांकि पार्टी के वरिष्ठï नेता नरेश अग्रवाल ने कांग्रेस सचिव अहमद पटेल से मुलाकात का खंडन किया, मगर कांग्रेस के सूत्र इसकी पुष्टिï कर रहे हैं। कांग्रेस सूत्रों का भी कहना है कि विवाद का हल न निकलने की स्थिति में राज्य में एक नया गठबंधन स्वरूप ले सकता है। यह भी चर्चा है कि रालोद, कांग्रेस और अखिलेश के गठबंधन की संभावना तलाशी जा रही है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टिï नहीं हो पाई।
पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा कि फिलहाल विवाद का कोई निष्कर्ष नहीं निकला है। निष्कर्ष अगर नकारात्मक रहा तो वह विभिन्न दलों के नेताओं से अपने संबंध का उपयोग नया मोर्चा खड़ा करने में लगाएंगे। इस बीच मंगलवार सीधे मुलायम पर निशाना साधने वाले रामगोपाल ने बुधवार को चुप्पी साधे रखी। उनके एक समर्थक का कहना था कि अखिलेश ने बर्खास्त मंत्रियों को बहाल करने का सुझाव खारिज कर सपा प्रमुख को संदेश दे दिया है। दूसरी ओर शिवपाल यादव ने अखिलेश के करीबी मंत्री को पार्टी से निकाल कर कड़े तेवर दिखाना जारी रखा है। दोनों गुट एक दूसरे की धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। ऐसे में जब तक कोई नई परिस्थिति पैदा नहीं होगी तब तक रामगोपाल मीडिया से दूर रहेंगे।