करीब 500 सालों बाद आज यानी पांच अगस्त 2020 को अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमि पूजन संपन्न हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर की आधारशिला रखी। पूजा संपन्न होने के बाद पीएम मोदी ने देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि देश आज स्वर्णिम इतिहास रच रहा है। आज पूरा भारत राममय है। पूरा देश रोमांचित है, हर मन दीपमय है। आज पूरा भारत भावुक है। सदियों का इंतजार आज समाप्त हो रहा है।
सुंदरकांड के दोहे का जिक्र
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में सुंदरकांड के एक दोहे का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा, 'भय बिनु होइ न प्रीति'। यह पूरा दोहा कुछ इस तरह है, 'विनय न मानत जलधि जड़ गए तीनि दिन बीति। बोले राम सकोप तब भय बिनु होइ न प्रीति॥... भावार्थ: इधर तीन दिन बीत गए, किंतु समुद्र विनय नहीं मानता। तब श्री रामजी क्रोध होकर बोले- बिना भय के प्रीति नहीं होती!' इसके बाद श्री राम जी कहते हैं कि लछिमन बान सरासन आनू। सोषौं बारिधि बिसिख कृसानु॥ सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति। सहज कृपन सन सुंदर नीति॥॥ भावार्थ: हे लक्ष्मण! धनुष-बाण लाओ, मैं अग्निबाण से समुद्र को सोख डालूं। मूर्ख से विनय, कुटिल के साथ प्रीति, स्वाभाविक ही कंजूस से सुंदर नीति संभव नहीं है!'
सुंदरकांड के दोहे से दुश्मनों को कड़ा संदेश
पीएम मोदी द्वारा इस दोहे के जिक्र को पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को जोड़कर देखें तो इसमें एक बड़ा संदेश छिपा है। आपको यह बताने की जरूरत नहीं है कि पिछले कुछ सालों में सैन्य स्तर पर भारत मजबूत हुआ है। हाल ही में फ्रांस से पांच लड़ाकू विमान राफेल भारत आए हैं। इससे पहले चिनुक और अपाचे जैसे हेलीकॉप्टर भी भारतीय सेना में मौजूद हैं। पिछले कुछ महीनों से चीन के साथ सीमा विवाद भी तेज हो गया है। ऐसे में पीएम मोदी ने पांच अगस्त को महज पांच शब्द (भय बिनु होइ न प्रीति) से दुश्मनों को संदेश दे दिया है कि भारत अब कमजोर नहीं है और बिना भय के प्रीति (शांति) नहीं रहती।