मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह
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मणिपुर में भाजपा के नेतृत्व वाली एन बीरेन सिंह सरकार का राजनीतिक संकट गुरुवार को चार एनपीपी विधायकों की वापसी के साथ ही खत्म हो गया। दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह से मिलने के बाद चारों ने राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला से मिलकर इस्तीफा वापस लिया और सीएम को समर्थन दिया। चारों ने कुछ दिन पहले मंत्री पद से इस्तीफा देकर कांग्रेस का हाथ थाम लिया था।
दिल्ली से दोपहर में इंफाल लौटे एनपीपी प्रमुख कोनराड संगमा ने बताया कि उनके विधायकों का इस्तीफा अभी राज्यपाल ने स्वीकार नहीं किया है। इसे सभी वापस लेंगे। संगमा चारों विधायक के साथ दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिले थे। उनके साथ मेघालय के मुख्यमंत्री हेमंत बिश्व शर्मा भी मौजूद थे। भाजपा नेतृत्व से चारों विधायकों ने मुख्यमंत्री द्वारा दुर्व्यवहार की शिकायत की।
हालांकि पार्टी हाईकमान ने उन्हें समझा दिया। चारों एनपीपी विधायकों के पूर्वोत्तर जनतांत्रिक गठबंधन (एनईडीए) में वापस आने से बिरेन सिंह सरकार के पास आठ विधायकों के इस्तीफे और अयोग्य घोषित किए जाने के बाद 52 सदस्यीय विधानसभा में अब 27 विधायक हो गए हैं। नजमा हेपतुल्ला के पास समर्थन पत्र सौंपने के बाद चारों विधायक संगमा और शर्मा के साथ सीधे सीएमओ पहुंचे जहां सीएम बिरेन सिंह ने गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया।
इससे पहले बुधवार को राम माधव ने कहा था कि मणिपुर में बीरेन सिंह सरकार 2022 तक अपना कार्यकाल पूरा करेगी। माधव ने कहा था कि पार्टी ने अपने क्षेत्रीय सहयोगी नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के साथ सरकार के संकट का हल निकालने के प्रयासों को तेज कर दिया है।
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भाजपा महासचिव ने बताया था कि पिछले एक साल से सरकार की स्थिरता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। यह देखा गया है कि मणिपुर में गठबंधन की सरकार हमेशा स्थिर रही है और चुनाव जीत रही है। राम माधव ने इंफाल एयरपोर्ट पर संवाददाताओं से कहा, 'हम 2022 तक स्थिर रहेंगे (जब अगला विधानसभा चुनाव होगा)।'
इसी बीच सीबीआई की एक टीम इंफाल पहुंची, जहां उसने कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह से घर पूछताछ की। सिंह ने मणिपुर के राज्यपाल से मुलाकात की थी और भाजपा के तीन विधायकों सहित नौ विधायकों के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से समर्थन वापस लेने के बाद सरकार पर दावा ठोक दिया था।