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सोशल मीडिया पर नियंत्रण का प्रस्ताव नहीं लेकिन बनेगा सोशल मीडिया हब : सरकार

Mon, 23 Jul 2018 07:26 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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राज्यवर्धन सिंह राठौड़ - फोटो : PTI
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सूचना प्रसारण राज्य मंत्री राजवर्धन सिंह राठौर ने राज्य सभा में एक लिखित जवाब में बताया कि मंत्रालय में सोशल मीडिया पर नियंत्रण को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि मंत्रालय ने सरकार के कार्यक्रमों, नीतियों के संबंध में सोशल प्लेटफार्मों (फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब आदि) के जरिए सूचना के प्रवाह को सुविधाजनक बनाने के लिए एक 'सोशल मीडिया हब' के गठन का प्रस्ताव दिया है। 
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क्या है यह 'सोशल मीडिया हब'

हालांकि सरकार ने इस दिशा में अप्रैल के महीने में काम करना शुरू कर दिया था। सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले उपक्रम बेसिल ने 25 अप्रैल 2018 को एक टेंडर 'सोशल मीडिया कम्युनिकेशन हब' नाम से जारी किया है। यह टेंडर सोशल मीडिया एनालिटेकल टूल के लिए है। (संदर्भ संख्या बीईसीआईएल/सोशल मीडिया /एमआईबी/02/2018 दिनांक 25 अप्रैल 2018)

यह टूल या कहें सॉफ्टवेयर बहुचर्चित कैंब्रिज एनालिटिका टूल जैसा है। सोशल मीडिया हब के इस टूल के जरिये एजेंसी आपकी भेजी गई सभी ईमेल, उनके अटेचमेंट को पढ़ सकती है। साथ ही वह आपके फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब, गूगल प्लस, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन के अकाउंट और प्ले स्टोर पर नजर रखेगी। 
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सबसे अहम बात है कि यह टूल हर व्यक्ति के सभी अकाउंट पर नजर रख सकेगा। टूल उस व्यक्ति के अतीत में किए गए कमेंट, लेखों, भेजी गई मेल का भी अध्ययन करेगा। इस आधार पर वह उस व्यक्ति का पूरा प्रोफाइल तैयार करेगा। 

यह एक ऑनलाइन टूल होगा जो लगातार जानकारी इकट्ठा करता रहेगा। यह डेटा माइंनिग भी करेगा यानी डेटा का गहन विश्लेषण करेगा और उसके नतीजे एजेंसी के जरिये सरकार को देगा। 
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सरकार को खबरों की 'तोड़' सुझाएगा यह टूल

यह सॉफ्टवेयर सरकार को बताएगा कि किस मीडिया में क्या खबरें चल रही हैं। सरकार की किस योजना पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया है। यह सरकार को यह सुझाएगा कि किस तरह की खबरें चलाने से या जानकारी देने से खबरों के असर को बदला जा सकता है। इस तरह की खबरों के लिए वह सामग्री भी मुहैया करवाएगा। इसके लिए 20 विशेषज्ञ लोगों को नियुक्त किया जाएगा। 

खबरों के ट्रेंड को देखते हुए यह टूल यह भी बतलायेगा कि आने वाले दिनों में देश या विदेशी मीडिया में कौन सी खबरें सुर्खियों में रहेंगी। इसके बाद यह टूल यह भी सुझाएगा कि इन खबरों के जवाब में कौन सी खबरें चलाई जाएं जिससे पहले से चल रही खबरों के प्रभाव को निष्क्रिय किया जा सके। 

इस एजेंसी के कर्मचारी दो पाली में काम करेंगे। यह हर रोज छह रिपोर्ट मंत्रालय को एक तयशुदा प्रारूम में भेजेंगे और हफ्ते के सातों दिन चौबीस घंटे उपलब्ध रहेंगे। यह आकलन क्षेत्रवार होगा अर्थात देश के किस राज्य में, किन खबरों, घटनाओं और योजनाओं पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया है।

यह भारतीय भाषाओं हिंदी, उर्दू, बांग्ला, पंजाबी, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, तमिल और भारतीय भाषाओं के साथ-साथ अंग्रेजी, अरबी, जर्मन, चीनी, जर्मन जैसी विदेशी भाषाओं में भी डेटा का विश्लेषण करेगा। 
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