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राज्यसभा में पेश हुए तीन कृषि विधेयक, कांग्रेस बोली- ये डेथ वारंट पर हस्ताक्षर करने जैसा

Sun, 20 Sep 2020 11:30 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नरेंद्र सिंह तोमर- प्रताप सिंह बाजवा - फोटो : ANI
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राज्यसभा में रविवार को सरकार ने कृषि संबंधित तीन विधेयक कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020 और  कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020  पेश किए हैं। जिसपर चर्चा जारी है। विधेयक का विरोध करते हुए कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) समाप्त करने और कॉरपोरेट जगत को फायदा पहुंचाने के लिए कृषि विधेयक लेकर आई है।

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केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ऊपरी सदन में विधेयक पेश करते हुए कहा, 'ये दोनों विधेयक ऐतिहासिक हैं और किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले हैं। इस बिल के माध्यम से किसान अपनी फसल किसी भी जगह पर मनचाही कीमत पर बेचने के लिए आजाद होगा। इन विधेयकों से किसानों को महंगी फसलें उगाने का अवसर मिलेगा। मैं किसानों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि ये विधेयक न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने भी ने कहा है कि एमएसपी जारी है और आगे भी जारी रहेगी।'


उन्होंने आगे कहा, 'यह विधेयक इस बात का भी प्रावधान करते हैं कि बुआई के समय ही जो करार होगा उसमें ही कीमत का आश्वासन किसान को मिल जाए। किसानों का  संरक्षण हो सके और किसान की भूमि के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ न हो इसका प्रावधान भी इन विधेयकों में किया गया है।'
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यह भी पढ़ें- कृषि विधेयक पर बोली शिवसेना, केंद्र जागा तो ठीक वरना सभी विपक्षी दलों को एकजुट होना पड़ेगा

कांग्रेस ने एमएसपी खत्म करने का लगाया आरोप
राज्यसभा में रविवार को कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) समाप्त करने और कॉरपोरेट जगत को फायदा पहुंचाने के लिए दोनों नए कृषि विधेयक लेकर आई है। हालांकि सरकार ने इसका खंडन करते हुए कहा कि किसानों को बाजार का विकल्प और उनकी फसलों को बेहतर कीमत दिलाने के उद्देश्य से ये विधेयक लाए गए हैं।

राज्यसभा में कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा ने आरोप लगाया कि दोनों विधेयक किसानों की आत्मा पर चोट हैं, यह गलत तरीके से तैयार किए गए हैं तथा गलत समय पर पेश किए गए हैं। पार्टी इस विधेयक का विरोध करती है। पंजाब और हरियाणा के किसानों का मानना है कि ये उनकी आत्मा पर हमला है। इन विधेयकों पर सहमति किसानों के डेथ वारंट पर हस्ताक्षर करने जैसा है।
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बाजवा ने आरोप लगाया कि सरकार का इरादा एमएसपी को खत्म करने का और कॉरपोरेट जगत को बढ़ावा देने का है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार ने नए कदम उठाने के पहले किसान संगठनों से बातचीत की थी? उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों विधेयक देश के संघीय ढांचे के साथ भी खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि जिन्हें आप फायदा देना चाहते हैं, वे इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में नए कानूनों की जरूरत क्या है। उन्होंने कहा कि देश के किसान अब अनपढ़ नहीं हैं और वह सरकार के कदम को समझते हैं।

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