राज्यसभा के चेयरमैन हामिद अंसारी ने प्रक्रियागत कारणों से अरबों रुपये के बैंक लोन धोखाधड़ी मामले के आरोपी विजय माल्या का इस्तीफा खारिज कर दिया है।
राज्यसभा के महासचिव ने कहा कि माल्या का इस्तीफा पत्र प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। उस पर उसका मूल हस्ताक्षर नहीं है। माल्या ने सोमवार को विदेश से अंसारी को इस्तीफा पत्र का स्कैन कॉपी भेजी थी। उसने ऐसा बर्खास्तगी से बचने के लिए किया था। उसने कहा था कि वह नहीं चाहता कि उसके नाम और प्रतिष्ठा पर और कीचड़ उछाला जाए। इस बीच संसद की एथिक्स समिति ने उसे सदन से निष्कासित करने की योजना तैयार कर ली है।
सूत्रों ने बताया कि समिति के सदस्यों में इस बात पर एक राय है कि माल्या को अब सदन का सदस्य नहीं रहना चाहिए। उसने माल्या को जारी नोटिस पर आए जवाब को भी असंतोषजनक बताया है। समिति बुधवार को राज्यसभा को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। किसी भी सांसद को सदन से बर्खास्त करने के लिए सदन में एक प्रस्ताव पेश कर उसे पास करवाना पड़ता है।
समिति के चेयरमैन करण सिंह ने हालांकि इस बारे में कुछ भी खुलासा करने से इनकार करते हुए कहा कि समिति के प्रमुख होने के नाते उनके लिए बैठक में लिए गए फैसले की घोषणा करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि समिति की 25 अप्रैल और मंगलवार की हुई बैठकों में एक मत से फैसला लिया गया। गौरतलब है कि दीवालिया हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस और शराब कारोबारी माल्या पर विभिन्न बैंकों के 9400 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है।