सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा ने टीएमसी सांसद के मुद्दे से भटकने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “आपने उन्हें शून्यकाल में राजभवन का नाम बदलकर लोक भवन करने के विषय पर बोलने की अनुमति दी थी। उन्होंने मनरेगा और अन्य मुद्दों पर बात की। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह विषय से संबंधित नहीं है, इसलिए इसे हटाया जाना चाहिए और केवल लोक भवन से जुड़े मुद्दे ही स्वीकार किए जाएं।”
इस पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने नड्डा से सहमति जताते हुए दोहराया कि “विषय से हटकर कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं जाएगा।” हालांकि, इस बीच विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे टीएमसी सांसद सेन के समर्थन में खड़े हुए और कहा, “उन्होंने कोई भी अशोभनीय शब्द नहीं कहा। सब कुछ विषय से जुड़ा हुआ है। और यह विषय आपके कार्यालय द्वारा जांच के बाद ही उन्होंने उठाया है।”
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सरकार पर बहस रोकने का आरोप लगाते हुए खरगे ने कहा, “सदन के नेता दखल दे कर यह नहीं कह सकते कि जो भी कहा गया है वह अशोभनीय है और उसे हटाया जाए। वे बुलडोजिंग कर रहे हैं। आप संसदीय लोकतंत्र के अनुसार सदन नहीं चलाना चाहते।”
उधर खरगे की टिप्पणी पर नड्डा ने पलटवार करते हुए कहा, "मैंने कभी बुलडोज नहीं किया।" उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मांग सिर्फ इतनी थी कि विषय से संबंधित बातें ही रिकॉर्ड में रहें। उधर राज्यसभा के सभापति ने कहा कि कार्यवाही ठीक तरह से चल रही है और सदस्यों से अनुरोध किया कि शून्यकाल में सूचीबद्ध विषयों पर ही बोलें।
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