नोटबंदी के मुद्दे पर सोमवार को भी राज्यसभा में हंगामा होता रहा। इस दौरान एक सदस्य द्वारा दलाल शब्द के उपयोग ने माहौल को और बिगाड़ दिया। इस बात पर पक्ष और विपक्ष में काफी देर तक नोंकझोंक होती रही।
मामला इतना बिगड़ा कि पक्ष-विपक्ष और उप सभापति को संसदीय किताबों में इस शब्द के अर्थ तलाशने पड़े। करीब 20 मिनट बाद उप सभापति द्वारा इस शब्द को असंसदीय घोषित किए जाने के बाद मामला शांत हुआ।
दरअसल, सुबह से दो बार स्थगित होने के बाद जब दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई, तो सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने मंत्री वेंकैया नायडू के आचरण का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता जिस समय बोल रहे थे उस समय मंत्री भाजपा सदस्यों को उकसा रहे थे।
इस दौरान भाजपा सदस्यों द्वारा शोर मचाने पर अग्रवाल ने भाजपा सांसदों की ओर मुखातिब होकर बोले ये सरकारी दलाल हैं। इसके बाद भाजपा सांसदों ने आपा खो दिया। उप सभापति ने मंत्री के आचरण का मामला तो निपटा लिया, लेकिन दलाल शब्द को लेकर संविधान की किताबें खुलने लगीं।