संसद के शीतकालीन सत्र में नोट बंदी पर चर्चा के नियम के सवाल पर सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी जारी है। इस कारण सोमवार को भी संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने भारी हंगामा किया। सरकार ने नोट बंदी के फैसले को कालाधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग करार देते हुए अपने तेवर में नरमी नहीं लाने के संकेत दिए। जबकि विपक्ष ने भी मतदान वाले नियम पर चर्चा की मांग पर अडिग रहने की घोषणा करते हुए नोट बंदी पर प्रधानमंत्री से तत्काल बयान दिलाने की मांग की।
राज्यसभा में सपा सांसद नरेश अग्रवाल द्वारा भाजपा सांसद को सरकारी दलाल बताए जाने पर जम कर हंगामा हुआ। हंगामे के कारण बीते दिनों की तरह संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही ठप रही। हालांकि इसी हंगामे के बीच सरकार लोकसभा में आयकर कानून संशोधन बिल पेश करने में सफल हुई।
लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े ने कार्यस्थगन प्रस्ताव पर दिए गए नोटिस को स्वीकार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि आर्थिक अराजकता के कारण 70 मौतें हुई है। व्यापार चौपट हो रहा है। मगर प्रधानमंत्री सदन में बयान देने के बदले जनसभाओं में विपक्ष पर आरोप लगा रहे हैं। टीएमसी के सुदीप बंदोपाध्याय, सपा के मुलायम ङ्क्षसह यादव ने भी सरकार पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया। सपा प्रमुख ने कहा कि प्रधानमंत्री सदन में बयान क्यों नहीं दे रहे। उनकी क्या मजबूरी है। जिस प्रकार पीएम सदन की अवहेलना कर रहे हैं उससे पता चलता है कि उनके मन में संसद का कितना महत्व है।
इसके जवाब में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नोट बंदी देश की सबसे बड़ी समस्या कालाधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग है। पूरा देश इस मामले में प्रधानमंत्री के निर्णय के साथ खड़ा है। उन्होंने विपक्ष को प्रधानमंत्री की ओर से चर्चा में हस्तक्षेप करने का आश्वासन दिया और कहा कि यह स्पीकर को तय करना है कि इस पर चर्चा किस नियम के तहत हो।