राज्यसभा ने सोमवार को जोरदार विपक्षी हंगामे के बीच मणिपुर विनियोग विधेयक, 2025 और मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025 को पारित कर लोकसभा को लौटा दिया। विपक्षी सांसद बिहार में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के मुद्दे पर नारेबाजी कर रहे थे, जबकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मणिपुर के बजट पर विरोध को गलत ठहराया।
मणिपुर विनियोग विधेयक 2025-26 वित्तीय वर्ष के लिए राज्य की समेकित निधि से निश्चित रकम खर्च करने की अनुमति देता है। वहीं, मणिपुर जीएसटी संशोधन विधेयक का उद्देश्य जीएसटी परिषद द्वारा मंजूर निर्णयों को लागू करना है और यह मौजूदा अध्यादेश की जगह लेगा। दोनों विधेयक धन विधेयक के रूप में पेश किए गए और ध्वनि मत से पारित होकर लोकसभा को भेजे गए।
विपक्ष का विरोध और नारेबाजी
विपक्षी सांसदों ने दिन में चुनाव आयोग तक मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें बीच में रोककर हिरासत में ले लिया। इसके बाद वे सदन में पहुंचे और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को बोलने का मौका देने की मांग की। उन्होंने बिहार में एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ नारे लगाए और बिल पर मतदान के समय "नहीं" कहकर विरोध दर्ज कराया।
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वित्त मंत्री का जवाब
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि वे मणिपुर के मुद्दे की बात करते हैं, लेकिन जब बजट और जीएसटी बिल पेश होते हैं, तब किसी और मुद्दे पर हंगामा करते हैं और इनके खिलाफ मतदान करते हैं। उन्होंने इसे मणिपुर के विकास के खिलाफ कदम बताया।
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प्रक्रिया पूरी और बिल लोकसभा को भेजा
हंगामे के बीच भी सदन की कार्यवाही जारी रही और दोनों बिल ध्वनि मत से पारित हुए। विपक्ष की ओर से लगातार नारेबाजी होती रही, लेकिन अध्यक्ष ने वोटिंग पूरी कराकर दोनों विधेयकों को लोकसभा को लौटा दिया। इससे मणिपुर के आगामी वित्तीय वर्ष के बजट और कर संशोधन का रास्ता साफ हो गया।