राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में अवैध कॉलोनियों और झुग्गी बस्तियों को उजाड़ने से रोकने वाला कानून बृहस्पतिवार को राज्यसभा ने पास कर दिया। 31 दिसंबर, 2020 तक अवैध निर्माण को राहत देने वाले इस विधेयक को लोकसभा ने बुधवार को ही पास कर दिया था।
सदन में चर्चा के दौरान शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यदि यह बिल पास नहीं होता, तो राष्ट्रीय राजधानी में ‘अभूतपूर्व अराजकता’ फैल जाती, क्योंकि यहां हर साल छह लाख से ज्यादा लोग आ जाते हैं। इस कानून से 2020 तक लोगों को अवैध कॉलोनियों, झुग्गी बस्तियों और अन्य अवैध निर्माण पर दंडात्मक कार्रवाई से राहत मिल जाएगी।
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पुरी ने कहा कि 2008 से 14 के बीच कुछ क्यों नहीं हुआ, इसका मेरे पास कोई जवाब नहीं है, लेकिन वर्ष 2014 के बाद फास्ट ट्रैक पर काम शुरू हुआ। शहरी विकास मंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 में दिल्ली की आबादी 10 लाख से कम थी, जो 1951 में बढ़ कर 16 लाख हो गई और आज यह आबादी 186 लाख है।
राज्यसभा में इस पर चर्चा के दौरान विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्यों ने सवाल उठाए। केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने कहा कि यह शहर ज्वालामुखी पर बैठा है और आम आदमी सरकार के ढीले रवैये के कारण 2000 से ज्यादा अनधिकृत कॉलोनियों के बारे में कोई योजना नहीं बन पाई है। तृणमूल कांग्रेस के एन हक, जदयू के हरिवंश, नरेश अग्रवाल, टीके रंगराजन, वीर सिंह, विजिला सत्यनाथन और डी राजा ने सवाल उठाया कि अमीरों और अवैध फार्म हाउस के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती।