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Mallikarjun Kharge: 'सभापति ने सरकार के अहंकारी रवैये को सही माना'; उपराष्ट्रपति के पत्र पर खरगे का जवाब

Mon, 25 Dec 2023 10:02 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को मिलने का निमंत्रण दिया था। खरगे ने पत्र लिखकर मिलने में असमर्थता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली से बाहर हैं ऐसे में मिलना संभव नहीं है।
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मल्लिकार्जुन खरगे और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (फाइल) - फोटो : social media
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विस्तार
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कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उपराष्ट्रपति सह राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ को पत्र लिखा है। उन्होंने मुलाकात के निमंत्रण पर अपने जवाब में कहा, वह उनसे नहीं मिल पाएंगे क्योंकि वह इस समय दिल्ली से बाहर हैं। खरगे ने संसद से सामूहिक निलंबन को जनता की आवाज दबाने का प्रयास बताते हुए सभापति की भूमिका और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए।
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लोगों के अधिकार की रक्षा का आह्वान
सभापति धनखड़ को लिखे पत्र में खरगे ने कहा, सभापति सदन का संरक्षक होता है और उसे सदन की गरिमा बनाए रखने, संसदीय विशेषाधिकारों की रक्षा करने और संसद में बहस, चर्चा और उत्तर के माध्यम से अपनी सरकार को जवाबदेह रखने के लोगों के अधिकार की रक्षा करने में सबसे आगे रहना चाहिए।

सरकार का रवैया निरंकुश और अहंकारी
खरगे ने अपने पत्र में कहा, सत्तारूढ़ पार्टी सांसदों के निलंबन को 'लोकतंत्र को कमजोर करने, संसदीय प्रथाओं को नष्ट करने और संविधान का गला घोंटने' का हथियार बना चुकी है। उन्होंने कहा कि सभापति का पत्र 'दुर्भाग्य से संसद के प्रति सरकार के निरंकुश और अहंकारी रवैये को उचित ठहराता है।'
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146 सांसदों के मतदाताओं की आवाज पर प्रभावी अंकुश
धनखड़ के पत्र का बिंदुवार जवाब देते हुए खरगे ने कहा, 'राज्यसभा के सभापति के रूप में निष्पक्षता और तटस्थता के साथ' हालात पर चिंतन की जरूरत है। उन्होंने कहा, विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए विशेषाधिकार प्रस्तावों को भी हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। संसद को जानबूझकर कमजोर किया गया है। सरकार कुल मिलाकर 146 सांसदों के मतदाताओं की आवाज पर प्रभावी अंकुश लगा रही है।

विपक्षी सांसदों के सामूहिक निलंबन पर खरगे का बयान
धनखड़ ने लिखा है कि सदन में अव्यवस्था जानबूझकर फैलाई गई और यह रणनीतिक के साथ-साथ पूर्व निर्धारित भी थी। इस पर खरगे ने कहा, अगर रणनीतिक तरीके से ऐसा कुछ हुआ है, तो वह दोनों सदनों से विपक्षी सांसदों का सामूहिक निलंबन है। यह सरकार की तरफ से पूर्व निर्धारित और पूर्व नियोजित लगता है। बहुत दुख हो रहा है कि बिना पर्याप्त विचार के निलंबन किया गया है। विपक्षी दलों के गठबंधन- INDIA में शामिल एक सांसद का निलंबन, संसद में मौजूद नहीं होने के बावजूद हुआ, इससे सरकार की नीति साफ होती है।



पीठासीन अधिकारियों का कठोरता से मूल्यांकन
खरगे ने राज्यसभा में विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा न होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, यह बेहद दुखद है। इतिहास बिना बहस के पारित किए गए विधेयकों और सरकार से जवाबदेही की मांग न करने के लिए पीठासीन अधिकारियों का कठोरता से मूल्यांकन करेगा।

संसद की सुरक्षा का मुद्दा, सरकार पर गंभीर आरोप
उन्होंने अपने पत्र में संसद की सुरक्षा में चूक मामले पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान का भी जिक्र किया। खरगे ने कहा कि देश के गृह मंत्री चालू संसद सत्र के बावजूद एक टीवी चैनल पर ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर बयान देते हैं, लेकिन सदन में आकर बयान नहीं देते। यह दुर्भाग्यपूर्ण होने के साथ-साथ लोकतंत्र के मंदिर को अपवित्र करने जैसा कृत्य है। उन्होंने पूरी सरकार पर संसद की अवहेलना और उपेक्षा करने का आरोप लगाया।



दिल्ली लौटने के बाद यथाशीघ्र मिलने की बात कही
सभापति धनखड़ को लिखे पत्र में खरगे ने कहा कि उनसे मिलना उनका सौभाग्य होगा। खरगे ने कहा कि सभापति के निमंत्रण पर मुलाकात करना उनका कर्तव्य है। दिल्ली लौटने के बाद वह उनकी सुविधा के मुताबिक मुलाकात करने का हरसंभव प्रयास करेंगे। उन्होंने नववर्ष 2024 की अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं।

खरगे के पत्र पर सभापति ने भी माना- संसद में सार्थक संवाद होना चाहिए
धनखड़ ने बीते 23 दिसंबर को पत्र लिखा था। उन्होंने कहा था कि संसद में सार्थक चर्चा और संवाद को लेकर उनकी चिंता से वह भी पूरी तरह इत्तेफाक रखते हैं। उन्होंने कहा कि सदन को चलाने का उन्होंने हरसंभव प्रयास किया। सांसदों से गतिरोध दूर करने, असंसदीय आचरण से बचने की लगातार अपील की, लेकिन उनके तमाम प्रयास बेकार साबित हुए।
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संसद की मर्यादा का ध्यान रखें माननीय
खरगे को लिखे पत्र में सभापति ने भी लोकतंत्र के मंदिर को अपवित्र करने के प्रयास का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही को बाधित करने के लिए हंगामा और शोर-शराबा, हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संसद के उच्च सदन में हमें ऐसा आचरण करने की जरूरत है, जिसका बाकी लोग भी अनुकरण करें।



संसद के शीतकालीन सत्र में जबरदस्त हंगामा
गौरतलब है कि संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार से जवाबदेही की मांग करने के दौरान सदन में अशोभनीय आचरण करने के आरोपी कुल 46 सांसदों को निलंबित किया गया। हंगामा, शोरशराबा और तख्तियां लहराने के आरोप में लोकसभा से भी 100 सांसदों को निलंबित किया गया। सभापति धनखड़ और कुछ सांसदों के बीच तीखी तकरार भी दिखी। इसके अलावा लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला ने भी वेल में घुसकर नारेबाजी करने और तख्तियां लहराने वाले सांसदों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए सांसदों को पूरे सत्र से निलंबित कर दिया।
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