सार
राज्यसभा में सोमवार को SIR मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। हंगामे के बीच मणिपुर से जुड़े दो मनी बिल पास हुए, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाए। विवाद बढ़ने पर विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया। खरगे ने आरोप लगाया कि उन्हें चुनाव आयोग से मिलने से रोका गया।
राज्यसभा में सोमवार को SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपने प्रदर्शन का मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन नेता सदन जेपी नड्डा ने आपत्ति जताई और कहा कि यह उस समय सदन के एजेंडे का हिस्सा नहीं है। इससे सदन में हंगामा शुरू हो गया और कार्यवाही को बाधित करना पड़ा।
राज्यसभा में बिहार में एसआईआर को लेकर पिछले कई दिनों से व्यवधान हो रहे हैं। सोमवार को सुबह 11 बजे बैठक शुरू होते ही हंगामा बढ़ गया और सदन को स्थगित करना पड़ा। दोपहर दो बजे जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो विपक्षी सांसद मौजूद नहीं थे, क्योंकि उन्हें चुनाव आयोग की ओर मार्च करने के प्रयास के दौरान हिरासत में लेकर संसद मार्ग थाने ले जाया गया था।
मणिपुर से जुड़े बिलों के दौरान टकराव
सदन में मणिपुर विनियोग विधेयक, 2025 और मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025 पर चर्चा चल रही थी, तभी विपक्षी सांसद लौटे और खरगे ने चुनाव आयोग के प्रदर्शन का मुद्दा उठाना चाहा। सत्ता पक्ष ने इसका विरोध किया और अध्यक्षता कर रहे सस्मित पात्र ने स्पष्ट किया कि बिल से असंबंधित कोई भी बात रिकॉर्ड में नहीं जाएगी। इससे विपक्ष और भड़क गया और कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने आपत्ति जताई।
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बिल पास होने की प्रक्रिया पर सवाल
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिलों पर जवाब दिया और उपसभापति हरिवंश की अध्यक्षता में दोनों मनी बिल लोकसभा को वापस भेज दिए गए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि हंगामे के बीच बिल पास करना लोकतंत्र के साथ धोखा है। खरगे ने कहा कि सदन में व्यवस्था (ऑर्डर) के बिना चर्चा और विधेयक पारित करना उचित नहीं है। नड्डा ने जवाब दिया कि बिलों पर पहले से बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) में सहमति बनी थी, इसलिए सदन को बंधक नहीं बनाया जा सकता।
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नड्डा की टिप्पणी से नाराज विपक्षी सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। हंगामे के चलते सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा। बाद में खरगे ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर आरोप लगाया कि इंडिया गठबंधन के सांसद चुनाव आयोग को ज्ञापन देने जा रहे थे, लेकिन उन्हें रोका गया और मिलने नहीं दिया गया। यह मामला संसद और सड़क दोनों पर राजनीतिक टकराव का कारण बन गया है।