राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए 16 अक्तूबर की तारीख तय।
- फोटो : अमर उजाला
चुनाव आयोग ने मंगलवार को राज्यसभा की 12 सीटों पर चुनाव का एलान कर दिया। इनमें से एक राज्यसभा सीट पर उपचुनाव होना है। इन सभी सीटों पर 16 अक्तूबर को मतदान होगा। इनमें उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक सीट पर चुनाव होना है। वहीं, पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव होगा।
ऐसे में यह जानना अहम है कि राज्यसभा का चुनाव कैसे होता है? इसमें जीत का फॉर्मूला क्या है? जिन सीटों पर चुनाव होना है वो कब खाली हो रही हैं? पश्चिम बंगाल में उपचुनाव क्यों हो रहा है? कौन-कौन से चेहरे राज्यसभा से विदा लेने वाले हैं? जिन राज्यों में यह सीटें खाली हो रही हैं, वहां राजनीतिक दलों के लिए सीट जीतने का समीकरण क्या है? आइये विस्तार से जानते हैं...
पहले जानें- राज्यसभा का चुनाव कैसे होता है?
राज्यसभा में किस राज्य से कितने सांसद होंगे यह उस राज्य की जनसंख्या के हिसाब से तय होता है। राज्यसभा के सदस्य का चुनाव उस राज्य की विधानसभा के चुने हुए विधायक करते हैं, जिस राज्य से वह उम्मीदवार है। राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया लोकसभा और विधानसभा चुनाव से काफी अलग है, क्योंकि इस सदन के लिए मतदान सीधे जनता नहीं करती, बल्कि जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि करते हैं। राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल छह साल का होता है। राज्यसभा चुनावों के नतीजों के लिए एक फॉर्मूला भी तय किया गया है।
ये भी पढ़ें: राज्यसभा: यूपी की 10 और उत्तराखंड की एक सीट पर चुनाव का एलान, बंगाल की एक सीट पर भी उपचुनाव का शेड्यूल जारी
चुनाव नतीजों का ये फॉर्मूला क्या है?
जिस राज्य की राज्यसभा सीट के लिए चुनाव हो रहे हैं, उस राज्य के विधायक इसमें वोट डालते हैं। इन चुनाव में लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तरह वोट नहीं पड़ते। यहां विधायकों को वरीयता के आधार पर वोट डालना होता है।
विधायकों को चुनाव आयोग की ओर से एक विशेष पेन दिया जाता है। उसी पेन से उम्मीदवारों के आगे वोटर को नंबर लिखने होते हैं। एक नंबर उसे सबसे पसंदीदा उम्मीदवार के नाम के आगे डालना होता है। ऐसे दूसरी पसंद वाले उम्मीदवार के आगे दो लिखना होता है। इसी तरह विधायक चाहे तो सभी उम्मीदावारों को वरीयता क्रम दे सकता है। अगर आयोग द्वारा दी गई विशेष पेन का इस्तेमाल नहीं होता तो वह वोट अमान्य हो जाता है। इसके बाद विधानसभा के विधायकों की संख्या और राज्यसभा के लिए खाली सीटों के आधार पर जीत के लिए आवश्यक वोट तय होते हैं। जो उम्मीदवार उस आवश्यक संख्या से अधिक वोट पाता है वह विजयी घोषित होता है।
ये आवश्यक संख्या कैसे तय होती है?
इसे समझने के लिए उत्तर प्रदेश का उदाहरण लिया जा सकता है। यहां विधायकों की कुल संख्या 403 है। वहीं, कुल 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। हर एक सदस्य को राज्यसभा पहुंचने के लिए कितने विधायकों का समर्थन प्राप्त होना चाहिए इसके लिए एक तय फॉर्मूला है। यह फॉर्मूला यह है कि कुल विधायकों की संख्या को जितने राज्यसभा सदस्य चुने जाने हैं, उसमें एक जोड़कर विभाजित किया जाता है।
इस बार यहां से 10 राज्यसभा सदस्यों का चुनाव होना है। इसमें एक जोड़ने से यह संख्या 11 होती है। अब कुल सदस्य 403 हैं तो उसे 11 से विभाजित करने पर 36.6 आता है। इसमें एक जोड़ने पर यह संख्या 37.6 हो जाती है। यानी यूपी से राज्यसभा सांसद बनने के लिए उम्मीदवार को 38 प्राथमिक वोटों की जरूरत होगी। अगर विजेता का फैसला प्रथम वरीयता के वोटों से नहीं होता तो उसके बाद दूसरी वरीयता के वोट गिने जाते हैं।
1. उत्तर प्रदेश
राज्यसभा चुनाव के लिए यूपी से खाली हो रही सीटें।
- फोटो : अमर उजाला
क्या है उत्तर प्रदेश का समीकरण?
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। फॉर्मूला के हिसाब से यहां किसी उम्मीदवार को जिताने के लिए कम से कम 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। विधानसभा के मौजूदा संख्याबल को देखा जाए तो इस वक्त राज्य में कुल 397 विधायक हैं।
विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के मुताबिक सत्ताधारी एनडीए गठबंधन के 292 सदस्य हैं। इस संख्या बल के हिसाब से सत्ताधारी गठबंधन 10 में सात सीटों पर आसानी से जीत दर्ज कर सकता है। वहीं, 101 सदस्यों वाली सपा के लिए दो सीटों पर जीत तय है। एक सीट पर मामला फंस सकता है।
ये भी पढ़ें: यूपी: प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का एलान, 16 अक्तूबर को वोटिंग और नतीजे
उत्तर प्रदेश में संख्याबल।
- फोटो : अमर उजाला
- अगर यूपी विधानसभा के आंकड़ों को देखा जाए तो आठवें उम्मीदवार के लिए एडीए के पास 33 प्राथमिक वोट हैं। आठवें उम्मीदवार को जिताने के लिए उसे चार वोट की और जरूरत पड़ेगी। अगर राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल के दो वोट उसे मिलते हैं तो भी उसे दो वोट और चाहिए होंगे।
- विपक्षी गठबंधन की बात करें तो सपा को 101 सदस्यों के अलावा कांग्रेस के दो विधायकों का समर्थन भी उसे मिल सकता है। ऐसे में विपक्षी गठबंधन का संख्याबल 103 हो जाएगा। इस स्थिति में तीसरे उम्मीदवार के लिए उसके पास प्रथम वरीयता के 29 अतरिक्त वोट रहेंगे। यानी, विपक्ष को तीसरा उम्मीदवार जिताने के लिए प्रथम वरीयता के आठ अतरिक्त वोट की जरूरत पड़ेगी।
ये भी पढ़ें: यूपी: अगले महीने से राज्यसभा में शून्य हो जाएगी बसपा, राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा भी खतरे में; जानिए पूरी कहानी
2. उत्तराखंड
उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट पर चुनाव।
- फोटो : अमर उजाला
क्या है उत्तराखंड का समीकरण?
उत्तराखंड में कुल तीन राज्यसभा सीट हैं, जिनमें से इस बार एक सीट पर चुनाव है। यहां 70 विधायक हैं। इस लिहाज से किसी भी दल को अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए 36 प्राथमिक वोटों की जरूरत होगी।
ये भी पढ़ें: राज्यसभा: उत्तराखंड की एक सीट पर चुनाव का एलान, 16 अक्तूबर को होगी वोटिंग, इनका कार्यकाल होगा समाप्त
उत्तराखंड में विधानसभा का हाल।
- फोटो : अमर उजाला
विधानसभा के आंकड़ों के लिहाज से उत्तराखंड में भाजपा की जीत लगभग तय है। सदन में उसके पास बहुमत से ज्यादा (47) विधायक हैं।
3. पश्चिम बंगाल
बंगाल की राज्यसभा सीट पर चुनाव।
- फोटो : अमर उजाला
क्या है पश्चिम बंगाल का समीकरण?
- पश्चिम बंगाल में सिर्फ एक सीट पर उपचुनाव होना है। तृणमूल कांग्रेस से सांसद कोयल मलिक का कार्यकाल 3 अप्रैल 2032 को खत्म होना था, उन्होंने 16 जुलाई 2026 को इस्तीफा दे दिया था।
- यहां कुल 294 विधायक हैं। यानी राज्यसभा में किसी सदस्य को भेजने के लिए 148 प्राथमिक वोटों की आवश्यकता होगी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा की स्थिति।
- फोटो : अमर उजाला
बंगाल विधानसभा के आंकड़ों के हिसाब से इस राज्यसभा सीट पर भाजपा का सांसद बनना लगभग तय है। उसे प्राथमिकता के आधार पर सभी 148 वोट मिल जाएंगे।
| चुनावी कार्यक्रम / चरण |
निर्धारित तिथि |
समय |
| अधिसूचना जारी होने की तिथि |
29 सितंबर 2026 |
— |
| नामांकन की अंतिम तिथि |
6 अक्तूबर 2026 |
— |
| नामांकन पत्रों की जांच (Scrutiny) |
7 अक्तूबर 2026 |
— |
| नाम वापसी की अंतिम तिथि |
9 अक्तूबर 2026 |
— |
| मतदान की तिथि |
16 अक्तूबर 2026 |
सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक |
| मतगणना |
16 अक्तूबर 2026 |
शाम 5 बजे से |
| चुनाव प्रक्रिया संपन्न करने की तिथि |
19 अक्तूबर 2026 |
— |