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Rajya Sabha: राज्यसभा उपचुनाव से भाजपा-एनडीए को कितना फायदा हुआ; जिस सीट के लिए होगा मतदान, वहां समीकरण कैसे?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Wed, 28 Aug 2024 02:49 PM IST

सार

Rajya Sabha Bye Election: लोकसभा चुनावों और दो सदस्यों के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में 12 सीटें खाली हो गई थीं। मंगलवार को इनमें से 11 सीटों पर उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन हो गया। इससे एनडीए राज्यसभा में बहुमत के करीब पहुंच गया है। वहीं त्रिपुरा में एक सीट के लिए मतदान होगा जहां मौजूदा समीकरण एनडीए के पक्ष में हैं।
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राज्यसभा चुनाव 2024 - फोटो : AMAR UJALA
नौ राज्यों में राज्यसभा उपचुनाव की नामांकन की प्रक्रिया मंगलवार को खत्म हो गई। ये चुनाव 12 राज्यसभा सीटों के लिए हो रहे हैं। इनमें से 11 सीटों पर उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन हो गया है जबकि एक राज्यसभा सीट के लिए मतदान कराया जाएगा। निर्विरोध चुने जाने वालों केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं। 

मौजूदा सदस्यों के लोकसभा सांसद के तौर पर निर्वाचित होने के बाद राज्यसभा की 10 सीटें खाली हो गई थीं। वहीं बाद में राज्यसभा के दो सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था। अब इस चुनाव से भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को उच्च सदन में फायदा हुआ है। 


आइये जानते हैं कि राज्यसभा उपचुनाव में अभी क्या हुआ है? कहां से कौन राज्यसभा के लिए चुना गया है? त्रिपुरा में मतदान की जरूरत क्यों पड़ी? त्रिपुरा में समीकरण किसके पक्ष में हैं? ये राज्यसभा उपचुनाव क्यों हो रहे हैं? राज्यसभा उपचुनाव से किसे कितना कितना फायदा हुआ?

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राज्यसभा चुनाव 2024 - फोटो : AMAR UJALA
नौ राज्यों में राज्यसभा उपचुनाव की नामांकन की प्रक्रिया मंगलवार को खत्म हो गई। ये चुनाव 12 राज्यसभा सीटों के लिए हो रहे हैं। इनमें से 11 सीटों पर उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन हो गया है जबकि एक राज्यसभा सीट के लिए मतदान कराया जाएगा। निर्विरोध चुने जाने वालों केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं। 

मौजूदा सदस्यों के लोकसभा सांसद के तौर पर निर्वाचित होने के बाद राज्यसभा की 10 सीटें खाली हो गई थीं। वहीं बाद में राज्यसभा के दो सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था। अब इस चुनाव से भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को उच्च सदन में फायदा हुआ है। 

आइये जानते हैं कि राज्यसभा उपचुनाव में अभी क्या हुआ है? कहां से कौन राज्यसभा के लिए चुना गया है? त्रिपुरा में मतदान की जरूरत क्यों पड़ी? त्रिपुरा में समीकरण किसके पक्ष में हैं? ये राज्यसभा उपचुनाव क्यों हो रहे हैं? राज्यसभा उपचुनाव से किसे कितना कितना फायदा हुआ?

राज्यसभा उपचुनाव में अभी क्या हुआ है?
जिन 12 राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहा है उसके लिए अधिसूचना 14 अगस्त को जारी की गई थी। 21 अगस्त तक उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किया। 27 अगस्त नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख रही। 12 में से 11 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन हो गया है। इनमें से ज्यादातर सीटों पर एक ही उम्मीदवार ने पर्चा भरा और जहां एक से अधिक उम्मीदवार थे उन्होंने अंतिम समय में अपना नाम वापस ले लिया या खारिज हो गया। पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा की इकलौती सीट के लिए 3 सितंबर को मतदान होगा और इसी दिन नतीजा भी घोषित किया जाएगा।

त्रिपुरा में मतदान की जरूरत क्यों पड़ी?
12 में से 11 उम्मीदवारों को निर्विरोध चुना जा चुका है। बची हुई त्रिपुरा की सीट पर 3 सितंबर को विजेता का फैसला होगा। त्रिपुरा में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीब भट्टाचार्य ने पार्टी की तरफ से उम्मीदवार बनाए गए हैं। राजीब के सामने माकपा ने पूर्व विधायक सुधान दास को उतारा है। अब इस सीट का फैसला 3 सितंबर को मतदान के जरिए होगा। 

त्रिपुरा में मतदान होगा, तो समीकरण किसके पक्ष में हैं?
60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 33 विधायक हैं। दूसरे स्थान पर टिपरा मोथा पार्टी के 13 सदस्य हैं। इसके अलावा माकपा के 10, कांग्रेस के तीन और आईपीएफटी के एक विधायक हैं। एक सीट के लिए हो रहे चुनाव के लिए एक सदस्य को जीतने के लिए 31 प्राथमिक वोट की जरूरत होगी। ऐसे में भाजपा अकेले ही अपने उम्मीदवार को जिता सकती है। भाजपा उम्मीदवार राजीब भट्टाचार्य को एनडीए में शामिल टिपरा मोथा और आईपीएफटी का भी समर्थन है। 

राज्यसभा उपचुनाव - फोटो : सोशल मीडिया
कहां से कौन निर्विरोध चुना गया?
जिन 11 राज्यसभा सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ है, उसमें असम, बिहार और महाराष्ट्र में दो-दो, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना और ओडिशा में एक-एक सीट शामिल हैं। 10 मौजूदा सदस्यों के लोकसभा सांसद के तौर पर निर्वाचित होने के बाद राज्यसभा की सीटें खाली हो गई थीं। वहीं बाद में राज्यसभा के दो सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था। 

हरियाणा: राज्य से भाजपा की किरण चौधरी का निर्विरोध निर्वाचन हुआ है। हाल ही में तोशाम से विधायक किरण चौधरी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गई थीं। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आवश्यक संख्या बल न होने का हवाला देते हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की उम्मीदवारी न पेश करने की घोषणा की थी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा के राज्यसभा से इस्तीफे के कारण राज्य में चुनाव हुआ। दीपेंद्र ने रोहतक लोकसभा सीट से चुनाव जीता था। 

मध्य प्रदेश: राज्य से भाजपा प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन निर्विरोध चुने गए हैं। केरल से आने वाले भाजपा के दिग्गज नेता जॉर्ज कुरियन केंद्र में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी और अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

यह सीट मध्य प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे के कारण खाली हुई थी। सिंधिया ने गुना सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की। भाजपा नेता को केंद्र की मोदी कैबिनेट में दूरसंचार और पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय भी सौंपा गया है। 

राजस्थान: यहां से भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू निर्विरोध चुने गए। यहां तीन उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। इनमें से भाजपा के एक डमी उम्मीदवार सुनील कोठारी थे, जिन्होंने शुक्रवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। इनके अलावा निर्दलीय प्रत्याशी बबीता वाधवानी का नामांकन पत्र 22 अगस्त को जांच के दौरान रद्द कर दिया गया था। वहीं, विपक्षी कांग्रेस ने उपचुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया था। जिसके चलते बिट्टू उपचुनाव में एकमात्र उम्मीदवार बचे थे। पंजाब से आने वाले सिख नेता केंद्र सरकार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं। 

बिहार: राज्य से पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा और सुप्रीम कोर्ट के वकील मनन कुमार मिश्रा निर्विरोध चुने गए। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र और भाजपा नेता मिश्रा सत्तारूढ़ एनडीए के उम्मीदवार थे। राज्यसभा के सदस्य रहे भाजपा के विवेक ठाकुर और राजद की मीसा भारती लोकसभा चुनाव जीते थे और उच्च सदन से इस्तीफा दे दिया था।

महाराष्ट्र: यहां से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नितिन पाटिल और भाजपा के धैर्यशील पाटिल राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए। राज्यसभा की ये दोनों सीटें पीयूष गोयल और उदयनराजे भोसले के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने से रिक्त हुई थीं। महाराष्ट्र से भाजपा के राज्यसभा के सांसद रहे पीयूष और उदयनराजे अब लोकसभा के सदस्य हैं। मुंबई उत्तर सीट से जीते गोयल को मोदी सरकार में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री बनाया गया। वहीं दूसरे नेता उदयनराजे भोंसले सतारा से लोकसभा सांसद चुने गए। 

असम: प्रदेश भाजपा के राज्यसभा चुनाव उम्मीदवार रामेश्वर तेली और मिशन रंजन दास निर्विरोध चुने गए। डिब्रूगढ़ से पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल और काजीरंगा से कामाख्या प्रसाद तासा के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद दोनों सीटें खाली हुई थीं। विपक्षी दलों ने यहां उम्मीदवार नहीं उतारे थे। सोनोवाल केंद्र में खेल एवं युवा मामलों के राज्यमंत्री हैं। 

तेलंगाना: राज्यसभा उपचुनाव में निर्विरोध चुने वालों में कांग्रेस से वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी के भी शामिल हैं। कांग्रेस ने तेलंगाना में उपचुनाव के लिए वरिष्ठ वकील सिंघवी की उम्मीदवारी की घोषणा की थी। इस साल की शुरुआत में सिंघवी कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा चुनाव हार गए थे। तेलंगाना में हाल में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के के. केशव राव पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। राव ने उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था जिसके बाद उपचुनाव की जरूरत पड़ी। 

ओडिशा: भाजपा उम्मीदवार ममता मोहंता राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुई हैं। कुड़मी समुदाय की प्रमुख नेता ममता मोहंता के ओडिशा से राज्यसभा उपचुनाव के लिए भाजपा की उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल करने के कुछ घंटे बाद ही पार्टी के एक और नेता जगन्नाथ प्रधान ने 21 अगस्त को डमी उम्मीदवार के रूप में अपना पर्चा दाखिल किया था। भाजपा नेता जगन्नाथ प्रधान ने राज्यसभा उपचुनाव के लिए मंगलवार को अपना नामांकन वापस ले लिया।  

दरअसल, वहीं बीजू जनता दल (बीजद) की सांसद रहीं ममता मोहंता ने राज्यसभा सीट और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। मोहंता बीजद से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गईं।

राज्यसभा - फोटो : अमर उजाला
राज्यसभा उपचुनाव से किसे फायदा हुआ?
जिन नौ राज्यों की 12 राज्यसभा सीटों के उपचुनाव हो रहे हैं उनमें सात सीटें भाजपा, दो कांग्रेस और एक-एक राष्ट्रीय जनता दल (राजद), बीआरएस और बीजद के पास थीं। कांग्रेस और राजद दोनों ही विपक्षी गठजोड़ के प्रमुख घटक हैं। वहीं बीआरएस और बीजद अभी किसी भी गठजोड़ में शामिल नहीं हैं।

अब 11 सीटों पर उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन से उच्च सदन में भाजपा नीत एनडीए को फायदा हुआ है। भाजपा के आठ उम्मीदवार और उसके सहयोगी दलों, रालोम और राकांपा के एक-एक उम्मीदवार संसद के उच्च सदन के लिए निर्विरोध चुने गए। उधर कांग्रेस ने तेलंगाना से एक सीट जीती है जिससे राज्यसभा में इसकी कुल सीटें 27 हो गई हैं। 

राज्यसभा में कुल सीटें 245 हैं। अभी आठ सीटें रिक्त हैं, जिनमें चार जम्मू-कश्मीर और चार मनोनयन वाली सीटें हैं। इस तरह मौजूदा सदस्य संख्या 237 है और बहुमत का आंकड़ा 119 है। मंगलवार को एनडीए के सदस्य 111 हो गए। उच्च सदन में अकेले भाजपा के 96 सदस्य हैं, जो इसे सबसे बड़ी पार्टी बनाता है। एनडीए को छह मनोनीत और एक निर्दलीय सदस्य का भी समर्थन है। इस तरह, उसके सदस्यों की संख्या 118 हो गई, जो बहुमत से एक सीट कम है। हालांकि, 3 सितंबर को त्रिपुरा में होने वाले मतदान में भाजपा अकेले ही अपने उम्मीदवार को जिता सकती है। इस नतीजे के बाद एनडीए को राज्यसभा में बहुमत मिल जाएगा।
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