राज्यसभा के उपसभापति पी जे कुरियन ने बुधवार को बसपा सुप्रीमो मायावती से अपना इस्तीफा वापस लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि उनका इरादा मायावती को बोलने से रोकने का कतई नहीं था। ऐसी स्थिति सिर्फ संवादहीनता की वजह से बनी है।
इसलिए उनको अपना इस्तीफा वापस लेना चाहिए। कुरियन की अपील पर कांग्रेस समेत कई दलों ने सहमति जताई। संसदीय कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने भी इसे लेकर सहमति जताई।बसपा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने भी कहा कि मायावती का भी इरादा संसद की कार्यवाही बाधित करने का नहीं था। जब वह दलितों के मुद्दे पर बोल रही थी तो सत्तापक्ष के सदस्यों ने टोका टोकी कर रहे थे। जिसकी वजह से उनका समय व्यवधान में ही खर्च हो गया था। इसे लेकर ही बसपा सुप्रीमो व्यथित थी।
बुधवार को मायावती राज्यसभा नहीं आईं। वहीं बसपा सांसद भी मौन रहे। जेडीयू के सदस्य अली अनवर ने जब दलित वर्ग के लोगों के मैला ढोने की प्रथा अभी तक खत्म नहीं होने का मुद्दा उठाया था तो बसपा सदस्य इस पर भी खामोश रहे जबकि अन्य पार्टियों के सदस्यों ने इसका विरोध किया।