सरकार और विपक्ष के लिए नाक का सवाल बने उपसभापति चुनाव के लिए कभी पासा इधर तो कभी उधर पड़ रहा है। ताजा जानकारी के मुताबिक अब विपक्ष का गणित गड़बड़ाने लगा है। बीजू जनता दल ने विपक्ष के उम्मीदवार को समर्थन देने में आना-कानी करता दिख रहा है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने उड़ीसा के मुख्यमंत्री और बीजद प्रमुख से टेलीफोन पर बातचीत की थी। आजाद को बीजद के समर्थन की उम्मीद थी, लेकिन ऐन वक्त पर बीजद ने समर्थन देने में आनाकानी दिखाई है। इस तरह से गणित को गड़बड़ाता देखकर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने इस पद के लिए वंदना चह्वाण को मैदान में उतारने से कदम पीछे खींच लिया है।
इस तरह से विपक्ष के लिए आसान सा लग रहा उपसभापति का चुनाव अब पेंचीदा नजर आने लगा है। हालांकि अभी विपक्ष संख्या बल को अपनी तरफ करने की होड़ में जुटा हुआ है। सत्ता पक्ष के हौसले बुलंद हैं। पार्टी के नेता अपने उम्मीदवार जद(यू) के हरिबंश नारायण सिंह को करीब 125 मत मिलने का विश्वास जता रहे हैं।
244 सदस्यीय राज्यसभा में उपसभापति पद पर जीत के लिए 123 मतों की जरूरत हैं। यदि कुछ सदस्य इस चुनाव प्रक्रिया में भाग नहीं लेते, अनुपस्थित रहते हैं तो यह संख्या घट सकती है। जैसे पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने इससे अपनी पार्टी के सदस्यों को बाहर रहने की घोषणा की है।
पीडीपी के सदन में दो सदस्य हैं। इस तरह से विपक्ष के पास अभी 119 सदस्यों का समर्थन मिलने की उम्मीद ही बन पा रही है। इसमें कांग्रेस, सपा, बसपा, टीडीपी, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी समेत अन्य समान विचार धारा के दल शामिल हैं।
भाजपा के सदन में 73 विधायक हैं। तीन मनोनीत और तीन अन्य सांसद हैं। जद(यू) के छह, अकाली दल और शिवसेना के तीन-तीन सांसद हैं। बोडो पीपुल्स फ्रंट, नगा पीपुल्स फ्रंट, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट, आरपीआई के क्रमश: एक-एक सांसद हैं। इसके अलावा सत्ता पक्ष को एआईएडीएमके के 13, टीआरएस के छह सदस्यों का भी समर्थन मिलने का भरोसा मिला है।
ऐसे में यदि बीजद अपने नौ सदस्यों के साथ सत्ता पक्ष के साथ जाता है तो विपक्ष का पाला कमजोर पडऩे के पूरे संकेत हैं। फिलवक्त नौ अगस्त को होने वाले इस उपचुनाव के लिए अभी घमासान जारी है।