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Rajya Sabha Debate: 'सिंधु जल संधि को स्थगित करना सबसे अहम निर्णय', 'ऑपरेशन सिंदूर' पर चर्चा के दौरान जयशंकर

Wed, 30 Jul 2025 12:05 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जयशंकर - फोटो : Amar Ujala
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संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में पहलगाम आतंकी हमले और 'ऑपरेशन सिंदूर' पर विस्तार से चर्चा के दूसरे दिन विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने राज्यसभा को संबोधित किया। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के बाद के घटनाक्रम, सरकार की ओर से उठाए गए कदम और देश की विदेश नीति के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने विपक्ष के आरोपों पर भी पलटवार किया। विदेश मंत्री ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार की तरफ से कई कदम उठाए गए। इसके तहत कई राजनयिकों को वापस भेजा गया और पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजा गया। सबसे अहम जो कदम उठाया गया, वो था- सिंधु जल समझौते को स्थगित करना।

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'वे बस कुछ बातों को याद रखना पसंद करते हैं'
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, 'सिंधु जल संधि कई मायनों में एक अनोखा समझौता है। मैं दुनिया में ऐसे किसी भी समझौते के बारे में नहीं सुना या सोच सकता हूं, जहां किसी देश ने अपनी प्रमुख नदियों को उस नदी पर अधिकार के बिना दूसरे देश में बहने दिया हो। इसलिए यह एक असाधारण समझौता था और जब हमने इसे स्थगित कर दिया है, तो इस घटना के इतिहास को याद करना जरूरी है। कल मैंने लोगों को सुना, कुछ लोग इतिहास से असहज हैं। वे चाहते हैं कि ऐतिहासिक बातें भुला दी जाएं। शायद यह उन्हें शोभा नहीं देता, वे बस कुछ बातों को याद रखना पसंद करते हैं।'
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'तत्कालीन प्रधानमंत्री ने भारतीय राज्यों के हितों को अनदेखा किया'
सिंधु जल संधि पर जयशंकर ने कहा कि सिंधु जल संधि तब तक स्थगित रहेगी, जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को अपना समर्थन पूरी तरह से बंद नहीं कर देता। खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे। उन्होंने कहा कि जयशंकर ने कहा कि सिंधु जल समझौते के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री ने लोकसभा में दिए अपने भाषण में पाकिस्तान के हितों की बात की। उन्हें पाकिस्तान के पंजाब की फिक्र थी, लेकिन उन्होंने भारतीय राज्यों के हितों को अनदेखा किया। तत्कालीन पीएम ने उस वक्त लोकसभा में कहा कि संसद को ये हक नहीं कि कितना पैसा दिया जाए और कितना पानी। कहा जाता है कि सिंधु जल समझौता अच्छी भावना और दोस्ती के तहत किया गया, लेकिन 1960 के बाद से पाकिस्तान ने लगातार भारत पर हमले और आतंकवाद को बढ़ावा दिया।



'आतंकवाद को वैश्विक एजेंडे पर लाने में कामयाब रहे'
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, '... पिछले एक दशक में, हम आतंकवाद को वैश्विक एजेंडे पर लाने में कामयाब रहे हैं, चाहे वह ब्रिक्स हो, एससीओ हो, क्वाड हो या द्विपक्षीय स्तर पर...। 26 साल से वांछित तहव्वुर राणा को आखिरकार मोदी सरकार वापस ला पाई है और आज उस पर इस देश में मुकदमे चल रहे हैं।'

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ट्रंप के दावों को नकारा
जयशंकर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विपक्ष के आरोपों पर कहा कि मैं उनको कहना चाहता हूं, वो कान खोलकर सुन लें। 22 अप्रैल से 16 जून तक, राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच एक भी फोन कॉल नहीं हुआ।' 

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका के साथ बातचीत पर विदेश मंत्री ने कहा कि 9 मई को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रधानमंत्री को फोन करके चेतावनी दी कि अगले कुछ घंटों में पाकिस्तान हमला करेगा। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया था कि अगर कुछ भी हुआ, तो उसका उचित जवाब दिया जाएगा। ऐसा ही हुआ और हमारी प्रतिक्रिया ने पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणालियों को निष्क्रिय कर दिया और उनके हवाई अड्डों को निष्क्रिय कर दिया। हमें फोन आए कि पाकिस्तान लड़ाई रोकने के लिए तैयार है। हमसे बात करने वाले हर व्यक्ति को हमने यही जवाब दिया कि पाकिस्तानी पक्ष को एक अनुरोध करना होगा और वह अनुरोध डीजीएमओ के माध्यम से आना चाहिए। दुनिया में कहीं भी ऐसा कोई नेता नहीं था, जिसने भारत से अपने अभियान रोकने के लिए कहा हो। व्यापार से इसका कोई संबंध नहीं था।



'किसी भी मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं'
राज्यसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि जब ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ, तो कई देश यह जानने के लिए हमसे संपर्क में थे कि स्थिति कितनी गंभीर है और यह कब तक चलेगा। हमने सभी देशों को एक ही संदेश दिया कि हम किसी भी मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं हैं। हमारे और पाकिस्तान के बीच कोई भी समझौता केवल द्विपक्षीय होगा। हम पाकिस्तानी हमले का जवाब दे रहे थे और देते रहेंगे। अगर यह लड़ाई रुकनी है तो पाकिस्तान को अनुरोध करना होगा। यह अनुरोध केवल डीजीएमओ के माध्यम से ही आ सकता था।

'चीन गुरु' का भी जिक्र किया
संसद में विपक्ष की ओर से उठाए गए चीन के मुद्दे पर जयशंकर ने कहा कि कुछ 'चीन गुरु' हैं। उनमें से एक मेरे सामने बैठे सदस्य (जयराम रमेश) हैं, जिनका चीन के प्रति इतना गहरा लगाव है कि 'उन्होंने एक संधि बना ली थी भारत और चीन की, Chindia'... हो सकता है कि मुझे चीन के बारे में कम जानकारी हो, क्योंकि मैंने ओलंपिक के जरिए चीन के बारे में नहीं सीखा। कुछ लोगों को ओलंपिक की यात्रा के दौरान चीन के बारे में जानकारी मिली। आइए इस पर चर्चा न करें कि वे किससे मिले या उन्होंने क्या हस्ताक्षर किए। उन्होंने चीनी राजदूत से अपने घरों में निजी ट्यूशन भी ली। 'चीन गुरु' कहते हैं कि पाकिस्तान और चीन के बीच घनिष्ठ संबंध हैं। हम इसके बारे में जानते हैं और इससे निपट रहे हैं। हालांकि, यह कहना कि ये संबंध रातोंरात विकसित हुए, इसका मतलब है कि वे इतिहास की कक्षा के दौरान सो रहे थे।

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