बुधवार को राज्यसभा सांसदों के शपथ ग्रहण समारोह में शपथ ग्रहण करने के बाद भाजपा नेता उदयनराजे भोसले ने 'जय भवानी, जय शिवाजी के नारे लगाए थे।' इस पर उप-राष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति वेंकैया नायडू ने यह कहते हुए इस पर आपत्ति जताई थी कि कार्यक्रम उनके चैंबर में हो रहा है और नारे लगाने की अनुमति नहीं है। वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने नायडू के इस व्यवहार को महापुरुषों का अपमान बताते हुए नायडू को 20 लाख पोस्टकार्ड भेजने की बात कही है।
हालांकि, नायडू ने इसे लेकर गुरुवार के स्पष्टीकरण भी दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा परंपरागत व्यवहार के हिसाब से किया था, इसमें किसी का अपमान करने की कोई भावना नहीं थी। नायडू ने ट्वीट किया, 'मैं हमेशा से छत्रपति शिवाजी महाराज का मुखर प्रशंसक और देवी भवानी का उपासक रहा हूं। सदस्यों को याद दिलाया गया था कि शपथ लेने के समय परंपरागत व्यवहार के अनुसार नारे लगाने की अनुमति नहीं होती है। इसमें अपमान की कोई बात नहीं है।'
वहीं, उजयनराजे भोसले ने इस घटनाक्रम को लेकर कहा है कि उनके द्वारा नारे लगाए जाने के बाद सभापति वेंकैया नायडू ने जो किया उसमें उन्हें कुछ आपत्तिजनक नहीं लगा। उन्होंने जोर दिया कि उप-राष्ट्रपति ने शिवाजी महाराज का किसी तरह से अपमान नहीं किया। भोसने ने यह भी कहा कि अगर मराठा सम्राट को लेकर किसी तरह का अपमानजनक व्यवहार होता को वह खुद व्यक्तिगत रूप से उसके खिलाफ विरोध दर्ज करवाते।
वहीं, दूसरी ओर भाजपा का युवा मोर्चा राम मंदिर को लेकर शरद पवार के बयान पर उन्हें 10 लाख पोस्टकार्ड भेजने की तैयारी कर रहा है। भाजयुमो ने यह फैसला पवार के उस बयान को लेकर लिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि कुछ लोगों को लगता है कि मंदिर का निर्माण करने से महामारी खत्म हो जाएगी। पवार के इस बयान पर काफी विवाद हुआ था और भाजपा के कई नेताओं ने इसे आस्था से जोड़ते हुए भगवान राम के खिलाफ बताया था।