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All Party Meet: जगदीप धनखड़ ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, जज के घर से नकदी बरामदगी के मुद्दे पर हो रही चर्चा

Tue, 25 Mar 2025 05:42 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर नकदी मिलने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच शुरू करवा दी है। जांच पूरी होने तक जस्टिस वर्मा से सभी न्यायिक जिम्मेदारियां ले ली गई हैं। इस बीच संसद में यह मुद्दा उठा। राज्यसभा के सभापति ने मामले में सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है।
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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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दिल्ली हाईकोर्ट के जज के घर से नकदी बरामदगी पर चर्चा के लिए राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक शुरू हो गई है। बैठक में सदन के नेता जेपी नड्डा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे समेत सभी दलों के नेता भाग ले रहे हैं। इससे पहले राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही मंगलवार को सदन के सदस्यों की ओर यह मुद्दा उठाया गया था। 

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दरअसल, दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास से कथित तौर पर भारी मात्रा में नकदी की बरामदगी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सोमवार को जस्टिस वर्मा को अगले आदेश तक के लिए न्यायायिक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया। वहीं, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना द्वारा तीन सदस्यीय आंतरिक जांच समिति का गठन भी कर दिया गया। संसद के दोनों सदनों में भी नकदी की बरामदगी का मामला उठा था। 

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धनखड़ ने कहा कि उन्होंने सोमवार को सदन के नेता जेपी नड्डा और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे से बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दे पर मुलाकात की थी, जो शासन के विभिन्न विभागों में हलचल मचा रहा है। उन्होंने कहा, 'निस्संदेह यह मुद्दा काफी गंभीर है।' इस बीच कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने कहा कि न्याय केवल किया ही नहीं जाना चाहिए, बल्कि ऐसा होते हुए दिखना भी चाहिए, इसलिए ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। 

इस पर धनखड़ ने संसद की ओर से पारित राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) अधिनियम का जिक्र करते हुए कहा कि यदि न्यायिक नियुक्तियों के लिए तंत्र को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निरस्त नहीं किया गया होता, तो चीजें अलग होतीं। उन्होंने कहा कि इस कानून को राज्यसभा ने लगभग सर्वसम्मति से पारित किया था, जिसमें कोई मतभेद नहीं था।

धनखड़ ने कहा कि संविधान के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी को भी संविधान संशोधन के साथ छेड़छाड़ करने की अनुमति देता हो। उन्होंने कहा, 'संविधान संशोधन की समीक्षा या अपील का कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है। यदि संसद या राज्य विधानसभाओं द्वारा कोई कानून (पारित) किया जाता है, तो इस बात की न्यायिक समीक्षा हो सकती है कि यह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं।' 
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मल्लिकार्जुन खरगे ने क्या कहा?
इस बीच मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि जब उन्होंने और नड्डा ने सोमवार को धनखड़ से मुलाकात की, तो उन्हें लगा कि अगले कदम पर निर्णय लेने से पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को विश्वास में लिया जाना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने सदन के नेताओं की बैठक का अनुरोध किया था, जो अब मंगलवार दोपहर को होगी।

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