पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। उरी हमले के 10 दिन बाद भारत की जांबाज सेना ने उसकी सरजमीं पर पल रहे आतंकियों का घर में घुसकर सफाया किया था, फिर भी वह मान रहा है। बीती रात जम्मू कश्मीर के राजौरी में उरी दोहराने की साजिश रची गई, हालांकि सतर्क सुरक्षा बलों ने राजौरी हमले को नाकाम कर दिया और दो आत्मघाती हमलावरों को मार गिराया।
आतंकियों ने राजौरी जिले के परगल स्थित सैन्य शिविर पर हमले को विफल कर दिया। दो आत्मघाती हमलावरों ने यहां 16 सितंबर 2016 को हुआ उरी जैसा हमला दोहराने की कोशिश की, लेकिन उन्हें मार गिराया गया। हालांकि, इस दौरान तीन जवान भी शहीद हो गए। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, आतंकियों ने राजौरी के दारहाल इलाके में स्थित परगल सैन्य शिविर में घुसने की कोशिश की, लेकिन अलर्ट जवानों ने संदिग्धों को देखते ही फायरिंग शुरू कर दी। फिलहाल तलाशी अभियान जारी है।
उरी में 19 जवान हुए थे शहीद, 50 से लिया था बदला
उरी में चार आतंकियों ने सेना के क्षेत्रीय मुख्यालय पर हमला किया था। इस हमले में 19 जवान शहीद और 30 जवान घायल हुए थे। जवाबी कार्रवाई में चारों आतंकी मारे गए थे। इसके मात्र 10 दिन में भारत ने भी पीओके में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी और वहां चल रहे आतंकियों के अड्डों को तबाह कर दिया था। उरी हमले के बाद 28-29 सितंबर 2016 की अमावस की रात में 125 कमांडो ने सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था और 50 आतंकियों का काम तमाम कर दिया था। भारत की इस कार्रवाई ने दुनिया को दिखा दिया था कि वह अपने दुश्मनों को घर में घुसकर मारने की हिम्मत रखता है।
सिर्फ सात लोगों को थी सर्जिकल स्ट्राइक की जानकारी
सर्जिकल स्ट्राइक का ऑपरेशन इतना सीक्रेट था कि इसकी जानकारी सिर्फ सात लोगों को थी। पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल ऑपरेशन के लिए कमांडो को मात्र दो घंटे का समय दिया गया था। आसमान में करीब 35 हजार फुट की ऊंचाई से भारतीय वायु सेना के हेलिकॉप्टर इस ऑपरेशन की निगरानी कर थे। 125 कमांडो डोगरा और बिहार रेजिमेंट के थे। दोनों रेजिमेंट से तैयार विशेष संयुक्त पैरा कमांडो ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। कमांडो का चयन पंजाब, जम्मू, हिमाचल प्रदेश से हुआ और विशेष टीम का गठन किया गया। सुबह साढ़े चार बजे सभी कमांडो पैदल मार्ग से ही पीओके में घुसे और सफल होकर वापस आए।
इस तरह दिया था स्ट्राइक को अंजाम
28 सितंबर रात दो बजकर दस मिनट पर पुंछ से एलओसी पार कर कमांडो पाक अधिकृत कश्मीर के भिंबर, कैल क्षेत्र स्थित कैंप में पहुंचे। हमले से पहले आतंकियों के कैंप की पूरी जानकारी हासिल कर ली गई थी। आतंकी किस समय सोते हैं और कब खाना खाते हैं, इसकी जानकारी भी ली गई थी। इस सर्जिकल स्ट्राइक के समय 125 जवानों में से केवल 35 कमांडो ही कैंप के अंदर गए थे। बाकी कैंप के बाहर थे, जो ऑपरेशन को कवर कर रहे थे, ताकि बाहरी हमले से बचा जा सके।
इस दौरान पाकिस्तानी सेना का ध्यान बंटाने के लिए पुंछ व उरी सेक्टर पर एलओसी पर फायरिंग भी की गई। इस फायरिंग के दौरान ही जवानों ने सीमा पार की और आतंकियों पर हमला करके उन्हें ढेर करके वापस लौट आए। आतंकी कैंप एलओसी से 12-15 किलोमीटर दूर थे। पांच टीमों ने अलग-अलग तरीके से आतंकी कैंपों पर हमला किया।
उत्तरी कमान के नेतृत्व में हुआ था ऑपरेशन
सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान कमांडो के साथ एक गाइड भी था, जो एक साल से आतंकी ट्रेनिंग कैंप में मौजूद था। खास बात ये कि सर्जिकल स्ट्राइक के लिए चुने गए कमांडो के फोन भी बंद कर दिए गए थे। वह घर से भी एक महीने से दूर थे और घर में भी बात करने की इजाजत नहीं थी। पूरा ऑपरेशन उत्तरी कमान के नेतृत्व में हुआ।