केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 25 जून को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) पहुंचकर देश के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत के निर्माण की समीक्षा करेंगे। अधिकृत सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि राजनाथ बृहस्पतिवार को कोच्चि पहुंचेंगे और शुक्रवार को सीएसएल में पोत के निर्माण कार्य को देखेंगे।
सूत्रों के मुताबिक, रक्षा मंत्री का यह दो दिवसीय दौरान विमानवाहक पोत के समुद्री ट्रायल में देरी होने के दौरान किया जा रहा है। पोत को इस साल के पहले छह महीनों में समुद्र में उतारकर उसका परीक्षण किया जाना था, लेकिन कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कारण इस परीक्षण को टाल दिया गया था।
इससे पहले पिछले साल दिसंबर में सीएसएल की तरफ से किए बेसिन ट्रायल में विमानवाहक पोत पूरी तरह खरा उतरा था। बेसिन ट्रायल के सफल होने के साथ ही देश की यह महत्वाकांक्षी युद्धपोत निर्माण परियोजना समुद्री परीक्षण के निर्णायक चरण में पहुंच गई थी। समुद्री परीक्षण शुरू किए जाने से पहले बेसिन ट्रायल के दौरान युद्धपोत की मशीनरी और उपकरणों को तैरती हुई अवस्था में परखा जाता है।
आत्मनिर्भर भारत का सच्चा उदाहरण
- 20 हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है विमानवाहक पोत
- 75 फीसदी स्वदेशी सामग्री व उपकरण लगे हैं विमानवाहक पोत में
- 50 भारतीय कंपनियां शामिल हैं विभिन्न तरीकों से इसके निर्माण में
- 2000 प्रत्यक्ष रोजगार और 40 हजार अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए
- 85 फीसदी हिस्सा लागत का वापस भारतीय अर्थव्यवस्था में ही शामिल