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रक्षा क्षेत्र में भारत की बड़ी तैयारी: 218 करोड़ से बनेगी शक्ति इंजन की नई लाइन, राजनाथ सिंह रखेंगे नींव

Mon, 05 Oct 2026 11:01 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार को ओडिशा और विशाखापत्तनम में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई अहम परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे। ओडिशा में एचएएल की कोरापुट इकाई में 218 करोड़ रुपये की लागत वाली शक्ति इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन की आधारशिला रखी जाएगी। वहीं विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के पहले फ्लीट सपोर्ट शिप को लॉन्च किया जाएगा। आखिर इन दोनों परियोजनाओं से भारत की रक्षा क्षमता कितनी बढ़ेगी?
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राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार को रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। विशाखापत्तनम में वह भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे पहले फ्लीट सपोर्ट शिप यानी एफएसएस-1 को लॉन्च करेंगे। इसके साथ ही एफएसएस-5 का कील बिछाने का कार्यक्रम होगा। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में अपग्रेड किए गए स्लिपवे-4 और 300 टन क्षमता वाले गोलियथ क्रेन का भी उद्घाटन किया जाएगा। इसके बाद राजनाथ सिंह ओडिशा के सुनाबेड़ा पहुंचेंगे, जहां एचएएल की कोरापुट इकाई में 2,000वें एयरो इंजन की डिलीवरी से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होंगे और शक्ति इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन की आधारशिला रखेंगे।

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218 करोड़ रुपये की शक्ति इंजन सुविधा क्यों अहम है?
ओडिशा के कोरापुट में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की इकाई में शक्ति इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन स्थापित की जाएगी। इस परियोजना पर 218 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। नई उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल स्वदेशी हेलीकॉप्टरों की बढ़ती जरूरत को पूरा करने में किया जाएगा। इसमें ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर शामिल हैं। शक्ति इंजन कार्यक्रम भारत और फ्रांस की संयुक्त पहल है। इसमें एचएएल और सफरान हेलीकॉप्टर इंजन मिलकर भारत की सैन्य जरूरतों के लिए टर्बोशाफ्ट इंजन के विकास और निर्माण पर काम कर रहे हैं।

एचएएल कोरापुट के लिए 2,000वां एयरो इंजन क्यों खास है?
एचएएल की कोरापुट इकाई से 2,000वें एयरो इंजन की डिलीवरी रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगी। यह इकाई करीब छह दशक से भारत की एयरोस्पेस और रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने में योगदान दे रही है। कोरापुट इकाई की शुरुआत 1960 के दशक में हुई थी। समय के साथ यह सोवियत मूल के विमानों के इंजनों की सर्विसिंग से आगे बढ़कर आधुनिक लड़ाकू विमानों के इंजनों के निर्माण, ओवरहाल और रखरखाव तक पहुंची है। सुनाबेड़ा की यह सुविधा सुखोई-30एमकेआई विमानों के इंजनों के निर्माण और ओवरहाल से भी जुड़ी है।
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नौसेना को एफएसएस-1 से क्या फायदा होगा?
विशाखापत्तनम में राजनाथ सिंह भारतीय नौसेना के पहले फ्लीट सपोर्ट शिप एफएसएस-1 को लॉन्च करेंगे। यह पांच फ्लीट सपोर्ट शिप में पहला है। करीब 43,500 टन वजन वाले ये जहाज समुद्र में मौजूद युद्धपोतों को जरूरी सामान और सहायता उपलब्ध कराने के लिए बनाए जा रहे हैं। इससे युद्धपोतों को लंबे समय तक समुद्र में अभियान जारी रखने में मदद मिलेगी और हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की पहुंच तथा क्षमता बढ़ेगी। एफएसएस-1 को स्टील कटिंग के करीब 18 महीने बाद समुद्र में उतारा जा रहा है। एफएसएस-5 का कील बिछाया जाना इस पूरी परियोजना के श्रृंखलाबद्ध उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत होगा।

विशाखापत्तनम में कौन-कौन सी सुविधाएं शुरू होंगी?
हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में अपग्रेड किए गए स्लिपवे-4 की लंबाई और भार उठाने की क्षमता बढ़ाई गई है। इसके साथ 300 टन क्षमता वाला गोलियथ क्रेन लगाया गया है। इससे शिपयार्ड में 45,000 डीडब्ल्यूटी तक के बड़े और जटिल जहाजों का निर्माण और लॉन्च संभव होगा। कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन और रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार समेत अन्य लोग शामिल होंगे। राजनाथ सिंह की ओडिशा यात्रा को देखते हुए सुनाबेड़ा में सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। पूरी व्यवस्था का उद्देश्य भारत को रक्षा उपकरणों का खरीदार होने के बजाय उनके डिजाइन, विकास और निर्माण में सक्षम देश बनाना है।

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