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Rajnath Singh: राजनाथ सिंह बोले- अखण्ड भारत के पहले प्रधानमंत्री थे सुभाष चंद्र बोस

Sat, 12 Nov 2022 02:29 AM IST
Jeet Kumar पीटीआई, नई दिल्ली

सार

राजनाथ सिंह ने कहा कि आजाद हिंद सरकार जो अखण्ड भारत की पहली स्वदेशी सरकार थी। वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने बनाई और 21 अक्तूबर 1943 को उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : twitter/@rajnathsingh
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विस्तार
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि सुभाष चंद्र बोस अविभाजित भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। साथ ही उन्होंने दावा किया कि देश को आजादी मिलने के बाद उनके योगदान को नजरअंदाज कर दिया गया। भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा आयोजित ‘शोधवीर समागम’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भूमिका और दूरदृष्टि का पुनर्मूल्यांकन करने की जरूरत है। 

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नेताजी ने भारत माता की गुलामी की बेड़ियों को खत्म करने का एक सपना देखा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आजाद हिंद सरकार जो अखंड भारत की पहली स्वदेशी सरकार थी वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने बनाई और 21 अक्तूबर 1943 को उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। आगे कहा कि नेताजी ने छोटी सी अवस्था में ही भारत माता की गुलामी की बेड़ियों को खत्म करने का एक सपना देखा। उसके चलते उन्होंने आईसीएस जैसी नौकरी को ठोकर मार दी। उन्होंने अपना एक ही लक्ष्य बनाया भारत को अंग्रेजी हुकूमत से हर कीमत पर आजाद कराना है। इसके लिए उन्होंने आजाद हिंद फौज बनाई।

इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष बोस की एक भव्य प्रतिमा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समागम को संबोधित करते हुए बोले कि एक समय था जब आजाद भारत में जानबूझ कर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के योगदान को या तो नजरअंदाज किया जाता था या फिर उसे कम करके आंका जाता था। यहां तक उनके बारें में जुड़े तमाम ऐसे दस्तावेज थे, जिन्हें जनता के सामने लाने से भी परहेज किया जाता था। अभी हाल ही में हमने अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे राजशाही मानसिकता को त्याग कर राजपथ का नाम कर्तव्य पथ कर दिया हैं और इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष बोस की एक भव्य प्रतिमा भी लगा दी है ताकि नेताजी से लोग प्रेरणा लेकर अपने कर्तव्यों का पालन करें।

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नेताजी सुभाष के सपनों का भारत हम नहीं बना पाए
उन्होंने कहा कि आज भारत को आजाद हुए 75 वर्ष का समय बीत चुका है। मगर नेताजी सुभाष के सपनों का भारत हम नहीं बना पाए हैं। इसका सबसे बड़ा कारण रहा है कि आजादी के बाद देश में सत्ता ऐसे लोगों के पास रही जो अंग्रेजी शासन से मुक्ति मिलने के बावजूद उस गुलामी मानसिकता से नही निकल पाए। आगे कहा कि हाल ही में भारतीय नौसेना का अंग्रेजी निशान भी बदल दिया गया है। भारत के युद्ध पोतो पर अब सेंट जार्ज का क्रास नहीं भारतीय नौसेना के छत्रपति शिवाजी महाराज की मुहर से प्रेरित निशान लगाया जा रहा है।

1500 पुराने पड़ चुके कानूनों को हमने समाप्त किया
राजनाथ सिंह ने कहा कि अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे सैकड़ों कानूनों को हमने समाप्त कर दिया है और कुछ का संशोधन करने की तैयारी है। ऐसे करीब 1500 पुराने पड़ चुके कानूनों को हमने समाप्त किया है। इतना ही नहीं नेताजी सुभाष चंद्र बोस के भारत के स्वाधीनता संग्राम में किए गए योगदान के चलते हमारी सरकार ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में स्थित रॉस आइलैंड का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप, नील आइलैंड का नाम शहीद द्वीप और हैवलॉक आइलैंड का नाम स्वराज द्वीप कर दिया है।
 

आने वाली पीढ़ियों को नेताजी की जीवन गाथा से प्रेरणा मिलती रहेगी
रक्षा मंत्री राजनाथ ने कहा कि एक स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर भारत का जो सपना नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे महापुरुषों ने देखा था उनका धरातल तैयार करने के लिए भारत के पास, समृद्ध संस्कृति भी है और संसाधन भी हैं। आने वाली पीढ़ियों को नेताजी की जीवन गाथा से प्रेरणा मिलती रहे इसके लिए आवश्यक है कि उनके विराट जीवन पर लगातार शोध होता रहे। इतने महान व्यक्ति का जीवन किसी एक कालखंड तक सीमित नहीं हो सकता है। उस व्यक्तित्व को, उनके विचारों को समझने की हर एक पीढ़ी को कोशिश करनी चाहिए।

आगे कहा कि अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस को वह सम्मान फिर से दिया जाने लगा है, जिसके वे हमेशा से सच्चे हकदार रहे हैं। नेताजी से जुड़े करीब 300 से अधिक दस्तावेजों को जिन्हें लंबे समय से सार्वजनिक नहीं किया जा रहा था हमने उन्हें अवर्गीकृत करके भारत की जनता को समर्पित किया। 

भारत ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में पूरे विश्व में नंबर वन था
उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अधिकांश भारतीय, एक प्रखर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, आजाद हिंद फौज के सुप्रीम कमांडर और भारत की आजादी के लिए अनेक कष्ट सहने वाले क्रांतिकारी के रूप में जानते हैं। मगर बहुत कम लोग उन्हें अखंड-अविभाजित भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में देखते हैं। एक समय था जब भारत ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में पूरे विश्व में नंबर वन था। मगर सदियों की गुलामी के कारण हममें से बहुत सारे लोग भारत के उस गौरवशाली अतीत से परिचित नही हैं।

पाइथागोरस प्रमेय भारत ने 300 साल पहले ही खोज लिया
आगे उन्होंने कहा कि जो मैथ्स के छात्र रहे हैं वे Quadratric Equation से भी परिचित होंगे। यह Quadratic Equation कहां से आया। यह हमारे भारत में पैदा हुए श्रीधराचार्य की खोज थी। आज पूरी दुनिया में यह बात साबित हो चुकी है कि बोधायन ने पाइथागोरस प्रमेय पाइथागोरस से 300 साल पहले ही खोज लिया था। यह भारत देश आर्यभट्ट, वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त, बोधायन, चरक, सुश्रुत, नागार्जुन, कणाद से लेकर सवाई जयसिंह तक वैज्ञानिकों की एक लंबी परंपरा का साक्षी रहा है। कॉपरनिकस से लगभग 1000 वर्ष पूर्व आर्यभट्ट ने पृथ्वी के गोल होने और इसके अपनी धुरी पर घूमने की पुष्टि कर दी थी।

भारत एक समय में विश्व गुरु था
कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत एक समय में विश्व गुरु था और इसकी स्वर्णिम गाथा इतिहास के पन्नों में अंकित है। इस सदी में भारत को फिर से अपनी श्रेष्ठता के नये अध्याय लिखने होंगे। इसके लिए आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक क्षेत्र समेत जीवन के हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल करनी होंगी। उन्होंने कहा कि भारत अपार संभावनाओं का देश है, सुखद विरोधाभासों का देश है। यह एक ऐसा देश है जहां एक राजकुल में जन्मा बालक भिक्षुक बन विश्व को सबसे शांति प्रिय धर्म देता है, वहीं एक साधारण बालक एक गरीब ब्राह्मण की मदद से एक साम्राज्य की स्थापना कर लेता है।
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आने वाला समय भारत का
उन्होंने कहा कि आने वाला समय भारत का समय है। जब यूरोप का अभ्युदय हुआ था तो उसकी जमीन वहां हुए पुनर्जागरण जिसे अंग्रेजी में Renaissance कहते हैं, ने तैयार की थी। भारत की आजादी की जमीन भी स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद सरस्वती जैसे विचारकों ने सांस्कृतिक पुनर्जागरण के माध्यम से तैयार की थी। आज जब भारत पुन: विश्व गुरू के पद पर स्थापित होने की दिशा में बढ़ रहा है तो हमें अपने देश में आध्यात्मिकता और आधुनिकता दोनों को साथ लेकर चलना होगा। यही नए भारत का भावी स्वरूप होगा। यहां पर आप जैसे शोधवीरों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
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