उन्होंने कहा कि हम राज्य में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत बनाना चाहते हैं। इसके तहत स्थानीय निकायों को वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार दिया गया है। युवाओं को रोजगार के प्रबंध किये गए हैं और विकास कार्यो पर जोर दिया जा रहा है। अनुच्छेद 356 के प्रयोग के संदर्भ में राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्होंने स्वयं एक बार राज्यपाल से पूछा कि क्या वहां कोई भी सरकार बनाने के लिए तैयार नहीं है? मैंने अखबार में पढ़ा था कि नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी और कांग्रेस तीनों पार्टियां मिलकर सरकार बना सकती हैं।
लेकिन सुबह मैंने राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद का बयान पढ़ा कि कांग्रेस नहीं बनाना चाहती। इसलिए मेरी धारणा बनी कि वहां कोई भी सरकार नहीं बनाना चाहता। राज्यपाल ने भी कहा कि कोई भी सरकार नहीं बानाना चाहता है। राज्य में भाजपा और पीडीपी के मिलकर सरकार बनाने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि आप इसे अस्वाभाविक विवाह कहिए या क्या कुछ भी कहिए। जिसे नैचुरल मैरिज कहा जाता है वह भी कब टूट जाए, उसका पता नहीं।
सिंह ने कहा कि कश्मीर के लोग हमसे अलग नहीं है। कश्मीर की ऐसी हालात देखकर हर व्यक्ति को तकलीफ होती है। मैंने बार बार यही कहा है कि मैं कश्मीर की समस्या के समाधान के लिए तैयार हूं, आप :राजनीतिक दल: बताएं कि क्या किया जा सकता है?’’ उन्होंने कहा कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल कुछ दलों के नेता अलगावादियों से मिलने के लिए गए थे, लेकिन उन्हें किस तरह से लौटना पड़ा, उसका वह जिक्र नहीं करना चाहते। गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू्-कश्मीर के हालात बहुत नाजुक थे। हमने स्थिति को ठीक करने के लिए कई प्रयास किए। स्थानीय निकाय के चुनाव में यह किया। हमने स्थानीय निकायों को वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां दी हैं ताकि उनकी निर्भरता राज्य सरकार और केंद्र पर नहीं रहे।
उन्होंने कहा कि नौजवानों को रोजगार देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। सरकार की तरफ से जितना भी प्रयास होने चाहिए, हम कर रहे हैं। चर्चा में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस, माकपा, राकांपा, राजद, सपा, अन्नाद्रमुक सहित विभिन्न दलों ने हिस्सा लिया । कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगाये जाने को ‘‘असंवैधानिक’’ करार देते हुए शुक्रवार को लोकसभा में सवाल किया कि किन परिस्थितियों में अनुच्छेद 356 का प्रयोग किया गया और राज्य में विधानसभा चुनाव कब तक कराये जायेंगे ?